राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बड़ा संदेश दिया। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेने जा रहा है, जो पूरी तरह नारी शक्ति को समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है, जो सामाजिक न्याय और समानता को मजबूत करेगा।
16 से 18 अप्रैल तक संसद में होगी ऐतिहासिक चर्चा
पीएम मोदी ने बताया कि 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विशेष चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि दशकों से लंबित महिला आरक्षण का सपना अब साकार होने जा रहा है और इसे 2029 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
Speaking at the Nari Shakti Vandan Sammelan in Delhi. https://t.co/bnocSJqwYB
— Narendra Modi (@narendramodi) April 13, 2026
उन्होंने कहा कि यह अवसर किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है और सभी दलों को राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करना चाहिए।
महिलाओं की भागीदारी से बढ़ती है संवेदनशीलता
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शासन में संवेदनशीलता भी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि देश में 14 लाख से ज्यादा महिलाएं स्थानीय निकायों में काम कर रही हैं और कई राज्यों में पंचायतों में उनकी भागीदारी 50% तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ की सफलता का श्रेय भी पंचायत स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को दिया।
महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाओं का जिक्र
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘मातृ वंदना योजना’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘जन धन योजना’ शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं—जन्म से लेकर शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा तक।
महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर
प्रधानमंत्री ने ‘महिलाओं के विकास’ और ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत अब महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास का नेतृत्व करने वाला मानता है।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं फाइटर पायलट, वैज्ञानिक, उद्यमी और नीति-निर्माता के रूप में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। भारत में महिला पायलटों का प्रतिशत दुनिया में सबसे अधिक है और पीएचडी में लड़कियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है।
समावेशी और सशक्त भारत की ओर कदम
पीएम मोदी ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भारत को एक समतावादी और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से संसद इस ऐतिहासिक निर्णय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
दो शब्दों संदेश के
Narendra Modi का यह संबोधन साफ तौर पर बताता है कि भारत अब “महिला सशक्तिकरण” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह है कि—
महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि देश के विकास की निर्णायक शक्ति बनाया जा रहा है।
राजनीति, नीति-निर्माण और शासन में उनकी भागीदारी बढ़ाना ही एक संवेदनशील और समावेशी भारत की कुंजी है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और नई सोच का प्रतीक है।
“जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में आगे आती हैं, तो देश अधिक संवेदनशील, समावेशी और मजबूत बनता है—और अब भारत उसी दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है।”
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