लोकसभा में शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर वोटिंग होने जा रही है, जिसे केंद्र सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक परीक्षण माना जा रहा है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है, जबकि वर्तमान संख्या के अनुसार सरकार इस आंकड़े से पीछे बताई जा रही है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस अहम मौके पर सभी सांसदों से अपील करते हुए कहा कि वे “अंतरात्मा की आवाज” सुनकर मतदान करें। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने का यह ऐतिहासिक अवसर है और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए।
पीएम मोदी की अपील
Narendra Modi ने अपने संदेश में कहा कि सांसद अपने परिवार की महिलाओं—मां, बहन, बेटी और पत्नी—को याद करते हुए निर्णय लें। उन्होंने कहा कि यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा तो देश का लोकतंत्र और मजबूत होगा।
मैं सभी सांसदों से कहूंगा…
आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए …
देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है।
उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए।
ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 17, 2026
दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
महिला आरक्षण बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार विपक्ष का समर्थन जुटा पाती है या नहीं।
विपक्ष के सवाल
विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस बिल के साथ डिलिमिटेशन को जोड़कर राजनीतिक रणनीति अपना रही है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि बिना जनगणना के परिसीमन कराना संविधान के खिलाफ है और सरकार चाहें तो मौजूदा 543 सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दे सकती है।
सरकार का पक्ष
सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि परिसीमन की प्रक्रिया और सीटों का बंटवारा तय नियमों के तहत किया जाएगा। इसके बावजूद विपक्ष अपनी मांग पर कायम है।
अब सबकी नजरें लोकसभा में होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि महिला आरक्षण विधेयक इतिहास रच पाएगा या नहीं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel