अमेरिकी एजेंसी USAID और जॉर्ज सोरोस से जुड़ी विदेशी फंडिंग पर Enforcement Directorate (ED) की जाँच में बेंगलुरु की तीन कंपनियों – ASAR Social Impact Advisors, Rootbridge Services Pvt Ltd और Rootbridge Academy Ltd को लेकर सनसनीखेज खुलासे हुए हैं।
मुख्य खुलासे:
🔹 ED की जाँच:
➡️ Soros Economic Development Fund (SEDF) के जरिए 2021 से 2024 के बीच 25 करोड़ रुपये भेजे गए।
➡️ ASAR Social Impact Advisors को USAID से भी 2022-23 में 8 करोड़ रुपये मिले।
➡️ संदेह है कि फेमा (FEMA) का उल्लंघन हुआ है।
🔹 ASAR और CEEW का कनेक्शन:
➡️ ASAR का दावा – USAID का पैसा CEEW (Council on Energy, Environment and Water) को दी गई सर्विसेज के रीइंबर्समेंट के लिए था।
➡️ CEEW का दावा – जॉर्ज सोरोस और ओपन सोसायटी फाउंडेशन से कोई संबंध नहीं।
➡️ CEEW ने कहा कि यह सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़ा प्रोजेक्ट था, जो अब खत्म हो चुका है।
🔹 USAID की भूमिका पर सवाल:
➡️ ट्रंप प्रशासन पहले ही USAID पर “वोक, लेफ्ट और लिबरल एजेंडा” फैलाने का आरोप लगा चुका था।
➡️ अब ED यह जाँच रही है कि USAID का पैसा भारत में किस मकसद से आया।
सोरोस और भारत में फंडिंग विवाद:
🔹 2016 में भारत के गृह मंत्रालय ने Open Society Foundation (OSF) को “Prior Reference Category” में डाला था।
🔹 OSF को किसी भी NGO को फंड देने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी होती है।
🔹 अब ED यह जाँच रही है कि क्या सोरोस की संस्था ने भारतीय कानूनों का पालन किया।
संभावित प्रभाव:
✅ अगर फेमा उल्लंघन साबित हुआ, तो इन संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
✅ भारत में विदेशी फंडिंग और थिंक टैंक्स पर निगरानी और सख्त हो सकती है।
✅ यह मामला अमेरिका-भारत कूटनीति में भी नया विवाद पैदा कर सकता है।
USAID और जॉर्ज सोरोस की फंडिंग से जुड़ा यह विवाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी हस्तक्षेप और NGO फंडिंग नियमों पर नई बहस छेड़ सकता है। ED की जाँच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।