उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अपराध और नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस ने विभिन्न थानों के मालखानों में वर्षों से जमा 16,378 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थों को नष्ट कर दिया है। वहीं, अपराधियों से बरामद 4.206 किलोग्राम शुद्ध अफीम को नष्ट करने के बजाय सरकारी अफीम कारखाना, गाजीपुर भेजा गया है, जहाँ इसका उपयोग गंभीर बीमारियों की दवाएं बनाने में किया जाएगा।
सरकार का यह कदम न केवल अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि जब्त सामग्री को जनहित में उपयोग करने का एक अभिनव उदाहरण भी पेश करता है।
63 मामलों से जुड़े ड्रग्स किए गए नष्ट
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के विभिन्न थानों में लंबे समय से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जमा थे। इनकी सुरक्षा, भंडारण और दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय ड्रग डिस्पोजल कमेटी का गठन किया गया।
कमेटी में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया और न्यायालय, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों से सभी आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किए गए।
इसके बाद धौलाना स्थित अधिकृत बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट एंड डिस्पोजल प्लांट में 63 मामलों से संबंधित नशीले पदार्थों को वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से नष्ट किया गया।
15,735 लीटर नशीली कफ सिरप भी की गई नष्ट
नष्ट किए गए पदार्थों में सबसे बड़ी मात्रा नंदग्राम थाने से बरामद 15,735 लीटर कोडीन युक्त नशीली कफ सिरप की थी।
पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
गाजीपुर अफीम फैक्ट्री में बनेगी जीवनरक्षक दवाएं
जब्त की गई 4.206 किलोग्राम शुद्ध अफीम को गाजीपुर स्थित Government Opium and Alkaloid Works (GOAW) भेजा गया है।
यहाँ वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों की सहायता से अफीम की जांच और प्रोसेसिंग करते हैं। इसके बाद अफीम से मॉर्फीन और कोडीन जैसे महत्वपूर्ण औषधीय तत्व निकाले जाते हैं।
इन दवाओं में होता है उपयोग:
- कोडीन: सूखी खांसी की दवाओं और कफ सिरप में
- मॉर्फीन: कैंसर और गंभीर रोगों में होने वाले असहनीय दर्द के उपचार में
- दर्द निवारक इंजेक्शन और टैबलेट निर्माण में
विशेषज्ञों के अनुसार नियंत्रित और चिकित्सकीय उपयोग में ये तत्व लाखों मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होते हैं।
हर अफीम दवा बनाने योग्य नहीं होती
विशेषज्ञ बताते हैं कि तस्करों द्वारा पकड़ी गई हर अफीम दवा निर्माण के योग्य नहीं होती।
अक्सर अवैध कारोबार में शामिल लोग अफीम में:
- स्टार्च
- पाउडर
- रसायन
- आर्सेनिक
- लेड जैसी हानिकारक सामग्री
मिला देते हैं।
गाजीपुर और नीमच स्थित सरकारी कारखानों में शुद्धता की कठोर जांच के बाद ही अफीम को स्वीकार किया जाता है। यदि अफीम मिलावटी या खराब पाई जाती है तो उसे भी अन्य मादक पदार्थों की तरह नष्ट कर दिया जाता है।
योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का नया मॉडल
उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि अपराधियों से जब्त की गई सामग्री केवल सबूत के तौर पर वर्षों तक मालखानों में पड़ी रहने के बजाय समाज के हित में उपयोग की जानी चाहिए।
सरकार की इस नीति से दोहरे लाभ सामने आ रहे हैं:
पहला लाभ:
- नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक
- ड्रग माफियाओं के नेटवर्क पर प्रहार
दूसरा लाभ:
- जब्त शुद्ध अफीम का औषधीय उपयोग
- गंभीर रोगियों के उपचार में सहायता
थानों में नशे का भंडारण भी था बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक थानों में भारी मात्रा में ड्रग्स का भंडारण कई जोखिम पैदा करता है।
इनमें शामिल हैं:
- चोरी की आशंका
- पुनः अवैध बाजार में पहुँचने का खतरा
- रिकॉर्ड प्रबंधन की समस्या
- सुरक्षा संबंधी जोखिम
इसीलिए समय-समय पर मादक पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों के लिए आवश्यक माना जाता है।
पर्यावरण को भी नहीं हुआ नुकसान
गाजियाबाद पुलिस ने नशीले पदार्थों को खुले में जलाने के बजाय अधिकृत बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में नष्ट किया।
इससे:
- वायु प्रदूषण नहीं हुआ
- पर्यावरणीय मानकों का पालन हुआ
- पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी बनी रही
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की यह कार्रवाई देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है, जहाँ अपराध से जुड़ी जब्त सामग्री का वैज्ञानिक और जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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