तमिलनाडु के कन्याकुमारी में समुद्र के ऊपर बने देश के पहले ग्लास ब्रिज का उद्घाटन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह पुल न केवल तकनीकी और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि कन्याकुमारी को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में और भी आकर्षक बनाता है। आइए इस पुल की विशेषताओं और महत्व को विस्तार से समझते हैं:
ग्लास ब्रिज की विशेषताएं:
- लंबाई और चौड़ाई:
- पुल की लंबाई 77 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर है।
- यह पर्यटकों को समुद्र के ऊपर चलते हुए शानदार अनुभव प्रदान करता है।
- कनेक्टिविटी:
- यह पुल विवेकानंद रॉक मेमोरियल और 133 फीट ऊंची तिरुवल्लुवर प्रतिमा को जोड़ता है।
- यह पुल दोनों प्रतिष्ठित स्थलों के बीच आवागमन को आसान बनाता है।
- सामग्री और संरचना:
- पुल को उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षित और मजबूत कांच से बनाया गया है, जो वजन और सुरक्षा दोनों के लिए आदर्श है।
- कांच का डिज़ाइन पर्यटकों को समुद्र की लहरों और गहराई का अद्भुत दृश्य देखने का मौका देता है।
- स्थानीय वास्तुकला का समावेश:
- पुल के डिज़ाइन में तमिलनाडु की पारंपरिक स्थापत्य शैली और आधुनिक तकनीक का अनूठा मिश्रण है।
- सुरक्षा मानक:
- पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुल पर मजबूत रेलिंग और अन्य सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
- अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पुल को भूकंप और समुद्री लहरों के प्रभाव से सुरक्षित बनाया गया है।
महत्व और पर्यटन पर प्रभाव:
- पर्यटन को बढ़ावा:
- यह पुल कन्याकुमारी को और भी लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनाएगा, खासकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए।
- समुद्र के ऊपर चलने का रोमांचक अनुभव इसे “मस्ट विजिट” डेस्टिनेशन बना देगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
- पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यवसायों, जैसे होटल, रेस्तरां और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
- सांस्कृतिक महत्व:
- विवेकानंद रॉक मेमोरियल और तिरुवल्लुवर प्रतिमा दोनों तमिलनाडु की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक हैं।
- इस पुल के माध्यम से पर्यटक इन दोनों स्थलों की यात्रा और उनके ऐतिहासिक महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के उद्घाटन के दौरान मुख्य बातें:
- दृष्टिकोण:
- मुख्यमंत्री ने इसे तमिलनाडु के विकास और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
- उन्होंने यह भी कहा कि यह पुल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा।
- सतत विकास:
- इस प्रोजेक्ट को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पूरा किया गया है।
- समुद्री पारिस्थितिकी को संरक्षित रखते हुए पुल का निर्माण किया गया।
देश का पहला ऐसा पुल
कन्याकुमारी के समुद्र तट पर बने इस कांच के पुल को देश का पहला ऐसा पुल बताया जा रहा है। ये पुल पर्यटकों को विवेकानंद रॉक मेमोरियल और तिरुवल्लुवर की प्रतिमा और आसपास के समुद्र का बेहतरीन दृश्य दिखाता है। एक पर्यटक अधिकारी ने कहा है कि इस पुल के ऊपर चलने से एक रोमांचक अनुभव प्राप्त होता है।
37 करोड़ रुपये की लागत
तमिलनाडु सरकार की ओर से इस कांच के पुल का निर्माण 37 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। सीएम एमके स्टालिन ने पुल का उद्घाटन दिवंगत मुख्यमंत्री एम करुणानिधि द्वारा तिरुवल्लुवर प्रतिमा के अनावरण की रजत जयंती के अवसर पर किया है। उद्घाटन के बाद, मुख्यमंत्री स्टालिन, उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, राज्य के मंत्री, सांसद कनिमोझी और वरिष्ठ अधिकारी आदि ने एक साथ पुल पर चल कर इसका अनुभव लिया।
पर्यटन को बढ़ावा देना है मकसद
इस ग्लास ब्रिज को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की एक दूरदर्शी सोच के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका मकसद पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह कदम कन्याकुमारी को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयासों का एक हिस्सा है। बता दें कि इस ग्लास ब्रिज को अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गया है और इसे खारी हवा, जंग और तेज समुद्री हवाओं सहित कठोर समुद्री परिस्थितियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।