अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसी वजह से संभावित बड़े हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया गया है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए एक “बेहतरीन समझौता” तैयार किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि समझौते के दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही यूरोप में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
ट्रंप का दावा: ईरान नहीं बना पाएगा परमाणु हथियार
ट्रंप ने कहा कि इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उनके अनुसार, यही अमेरिका का प्रमुख लक्ष्य था और अब वह लक्ष्य पूरा होता दिखाई दे रहा है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम Strait of Hormuz को जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखा जाएगा।
तेल बाजार में राहत, कीमतों में 4.4% की गिरावट
ट्रंप के बयान का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखने को मिला। निवेशकों को क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद बंधी, जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 89 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता सफल रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिल सकती है और तेल आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हो सकती हैं।
ईरान ने नहीं मानी समझौते की पुष्टि
हालांकि ट्रंप के दावे के बावजूद ईरान ने अभी किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की है।
Iran के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वार्ताएं जारी हैं, लेकिन अमेरिका की कुछ मांगें ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी “रेड लाइन्स” से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
इजरायल की भी नजर, नेतन्याहू ने की ट्रंप से बात
इस घटनाक्रम के बीच Benjamin Netanyahu ने भी ट्रंप से बातचीत की है। इजरायल ने कहा है कि वह इस समझौते का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और क्षेत्रीय आतंकवाद पर रोक लगाने वाली शर्तों का समर्थन करता है।
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है।
कुछ घंटे पहले दी थी बड़े हमले की चेतावनी
दिलचस्प बात यह है कि समझौते की बात करने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है और ईरान के प्रमुख तेल केंद्र Kharg Island को निशाना बनाया जा सकता है।
इसके जवाब में ईरानी सेना ने भी अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। ऐसे में अचानक समझौते की संभावना सामने आने से वैश्विक कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
क्या युद्ध टलेगा या बढ़ेगी अनिश्चितता?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हो जाते हैं तो पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है। हालांकि ईरान की ओर से अभी अंतिम सहमति नहीं मिलने के कारण स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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