छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में स्थित कोडकुर्से इलाके के कराकी गाँव में 16 नवंबर 2025 (रविवार) को एक विशेष धार्मिक आयोजन के तहत अनुसूचित जनजाति समुदाय के तीन परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सनातन धर्म को स्वीकार किया। यह प्रक्रिया पूर्णतः पारंपरिक और वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपन्न की गई। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई, जिसमें ग्रामीणों की बड़ी संख्या शामिल रही।
अनुष्ठान के बाद इन परिवारों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे अब से सनातन धर्म के सिद्धांतों, परंपराओं और सामाजिक-धार्मिक आचारों को अपनाकर जीवन व्यतीत करेंगे। इस अवसर पर गाँव में आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला, जहाँ ढोल-नगाड़ों की ताल पर ग्रामीण महिलाएँ नृत्य करती नजर आईं। गाँव के लोगों ने इस घटना को सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्मिलन के रूप में देखा और इसे उत्सव की तरह मनाया।
यह घटना स्थानीय स्तर पर न केवल धार्मिक जागरूकता बल्कि सांस्कृतिक पहचान की पुनः स्थापना के रूप में भी चर्चा में है, जहाँ समुदाय ने अपनी पारंपरिक जड़ों से दोबारा जुड़ने का निर्णय लिया।
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