भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हाई एंड्योरेंस ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) का सफल परीक्षण किया है। यह भारतीय नौसेना और तटीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
AUV: भारत की नई समुद्री निगरानी शक्ति
✅ स्वायत्त (Autonomous) संचालन: AUV बिना किसी चालक के स्वतंत्र रूप से पानी के अंदर काम कर सकता है।
✅ समुद्री निगरानी: यह वाहन सतह और गहराई दोनों स्तरों पर निगरानी कर सकता है।
✅ साइलेंट ऑपरेशन: यह बेहद कम आवाज में काम करता है, जिससे इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
✅ नौसेना बेस से संपर्क: यह नौसेना के बेस स्टेशन से लगातार संपर्क बनाए रख सकता है।
✅ सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन: यह पानी के अंदर खोज और बचाव अभियानों में मदद कर सकता है।
#WATCH | High Endurance Autonomous Underwater Vehicle currently under development by NSTL has been successfully tested in lake. During the trials vehicle dynamics was proven in both surface and submerged condition through multiple runs with perfect performance of Sonars and… pic.twitter.com/4zd5DBSzc0
— ANI (@ANI) March 31, 2025
भारत की नई टेक्नोलॉजी
दुनिया के कुछ गिने-चुने देशों के पास ही AUV तकनीक है, और अब भारत भी इस एलीट क्लब में शामिल हो गया है। इससे भारतीय नौसेना को समुद्र में निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और संभावित खतरों को पहले ही पहचानने में मदद मिलेगी।
कैसे करेगा काम?
📌 AUV खुद अपनी दिशा और गहराई तय कर सकता है।
📌 यह सोनार और संचार प्रणाली से लैस है, जिससे यह आसानी से सतह और पानी के अंदर के डेटा इकट्ठा कर सकता है।
📌 यह दुश्मन की पनडुब्बियों, समुद्री खतरों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेगा।
भारत की नौसेना के लिए गेम-चेंजर
इस AUV के सफल परीक्षण के साथ, भारतीय नौसेना को एक अत्याधुनिक स्वदेशी समुद्री निगरानी प्रणाली मिल गई है। यह भविष्य में समुद्री सुरक्षा, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, खुफिया जानकारी जुटाने और खोज एवं बचाव अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।