भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की यह कार्रवाई ई-कॉमर्स कंपनियों पर सरकारी सख्ती का संकेत देती है। अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छोटे शहरों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं, लेकिन ग्राहकों तक सही और प्रमाणित उत्पाद पहुंचाना भी उनकी ज़िम्मेदारी है।
बीआईएस की कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- छापेमारी और जब्ती – चेन्नई के तिरुवल्लूर में 36 लाख रुपये मूल्य के सामान जब्त किए गए, जिनमें इंसुलेटेड फ्लास्क, पानी की बोतलें, सीलिंग फैन, और खिलौने शामिल थे।
- BIS मानकों का उल्लंघन – इन उत्पादों पर आवश्यक ISI मार्क या BIS लाइसेंस नहीं था, जिससे उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठता है।
- देशभर में अभियान – लखनऊ, गुरुग्राम और दिल्ली में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब ई-कॉमर्स कंपनियों को भी गुणवत्ता मानकों का पालन करने के लिए मजबूर कर रही है।
सरकार की सख्ती क्यों जरूरी?
- ग्राहकों को अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत या नकली उत्पादों की समस्या का सामना करना पड़ता है।
- बिना BIS प्रमाणन वाले उत्पाद सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सकते, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है।
- भारत सरकार “मेक इन इंडिया” और “लोकल फॉर वोकल” जैसी योजनाओं को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में नकली और मानकहीन उत्पादों पर लगाम लगाना जरूरी हो जाता है।