केरल के ईसाई और उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वक्फ संशोधन विधेयक संसद में पारित होने के बाद सड़कों पर जश्न मनाते दिखाई दिए। सोशल मीडिया उनका जश्न मनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में मुस्लिमों ने केंद्र सरकार के इस कदम का समर्थन करते हुए दीये, फुलझड़ियां जलाईं और मिठाइयां बांटीं। वहीं, केरल के ईसाइयों ने विधेयक पारित होने की खुशी में ‘नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। साथ ही उम्मीद जताई कि नया कानून लागू होने के बाद यह मामला सुलझ जाएगा। दरअसल, एर्नाकुलम जिले के मुनंबम गांव में वक्फ बोर्ड ने 400 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रखा है, जहां कई ईसाई परिवार बसे हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उनकी भूमि और संपत्ति पर अवैध रूप से स्वामित्व का दावा कर रहा है, जबकि उनके पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान रसीदें हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुनंबम के लगभग 600 परिवारों ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होते ही पटाखे फोड़े। ये लोग मुनंबम भू संरक्षण समिति के बैनर तले 173 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे।
केंद्र सरकार द्वारा जनता के हित में पारित किए विधेयक को लेकर सोशल मीडिया पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। यूजर्स ने इसे समाज के प्रत्येक वर्ग के हित लिया गया निर्णय बताते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि वक्फ अधिनियम कितना कठोर था। इसका विरोध करने वाले लोगों को ही इसका लाभ मिल रहा था। एक्स पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश वर्मा लिखते हैं, “केरल में ईसाई समुदाय वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने का जश्न मना रहा है। कुछ प्रमुख मुस्लिम हस्तियों ने भी इस विधेयक का स्वागत किया है और हिंदू भी जश्न मना रहे हैं। अब यह स्पष्ट हो गया है कि समाज का हर वर्ग वक्फ के कामकाज से परेशान था।
विपक्षी दल सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए अफवाह फैला रहे थे कि यह विधेयक मुस्लिमों के हित में नहीं है।” सुरेंद्र यादव अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते लिखते हैं- वक्फ बोर्ड के कारण बहुत से लोग दुखी हैं और उन्हें सहायता प्राप्त करना वास्तव में सराहनीय है। मैं भी उन्हीं में से एक हूं। बता दें कि वक्फ जमीनों को लेकर बनाए गए पुराने कानून के अनुसार, अगर कोई जमीन लंबे समय से वक्फ द्वारा इस्तेमाल की जा रही है तो उसे वक्फ का माना जा सकता है। तब अगर जरूरी कागजात नहीं होते थे, तो उस जमीन को वक्फ का मान लिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।