बेलगावी के कांग्रेस नेता मुजामिल अत्तर के खिलाफ केस इसलिए दर्ज हुआ है क्योंकि उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर औरंगजेब और टीपू सुल्तान की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा — “बाप हैं तुम्हारे, भूलना मत।”
इसके साथ ही उन्होंने एक एग्रेसिव फिल्म क्लिप भी डाली, जिससे मामला और भड़क गया।
मुद्दे की गंभीरता:
-
मुजामिल अत्तर का यह पोस्ट सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाला माना गया है, क्योंकि इसमें क्रूर मुगल शासक औरंगज़ेब को “बाप” कहकर संबोधित किया गया।
-
पोस्ट में ‘ज्वाला सी जलती है’ जैसे आक्रामक डायलॉग के इस्तेमाल ने इसे और अधिक भड़काऊ बना दिया।
-
यह मामला उस समय सामने आया है जब कर्नाटक में सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील स्थिति बनी हुई है।
पुलिस की कार्रवाई:
-
IPC की धाराओं के तहत मुजामिल अत्तर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
-
बेलगावी मार्केट पुलिस ने आईटी ऐक्ट और धार्मिक भावना भड़काने से जुड़ी धाराओं में केस लिया है।
-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से पोस्ट डिलीट होने के बावजूद मामले की जांच जारी है, क्योंकि स्क्रीनशॉट और क्लिप्स पहले ही वायरल हो चुके हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
-
भाजपा और हिंदू संगठनों ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा है कि “कांग्रेस की सोच मुगल मानसिकता से जुड़ी हुई है।”
-
स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं कि ऐसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई हो और उन्हें पार्टी से निकाला जाए।
-
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
पृष्ठभूमि में ‘छावा’ फिल्म का असर:
-
‘छावा’, जो छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है, उसमें औरंगज़ेब की क्रूरता को प्रमुखता से दिखाया गया है।
-
फिल्म के बाद महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण भारत तक औरंगज़ेब को लेकर भावनाएँ एक बार फिर भड़क उठी हैं।
-
कई स्थानों पर मुगल शासकों की विरासत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है – खासकर यह सवाल कि क्या ऐसे शासकों को महिमामंडित करना सही है?
बेलगावी का यह मामला इतिहास, राजनीति और धर्म के उस संवेदनशील चौराहे पर खड़ा है, जहाँ ज़रा सी चूक भी सामाजिक अशांति का कारण बन सकती है। ऐसे में ज़रूरत है कि—
-
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार किया जाए,
-
सरकारें और पार्टियाँ स्पष्ट नीति और रुख अपनाएँ,
-
और पुलिस तटस्थ और तत्पर होकर कानून के अनुसार कार्रवाई करे।