यह संदेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्षों की यात्रा और उसके उद्देश्यों को रेखांकित करता है। इसमें संघ की स्थापना, उसकी कार्यपद्धति, हिंदू समाज के दायित्व और भविष्य के संकल्पों का उल्लेख किया गया है। अनंत काल से ही हिंदू समाज एक प्रदीर्घ और अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण हैI तेजस्वी मातृशक्ति सहित संतों, धर्माचार्यों, तथा महापुरुषों के आशीर्वाद एवं कर्तृत्व के कारण हमारा राष्ट्र कई प्रकार के उतार–चढ़ावों के उपरांत भी निरंतर आगे बढ रहा है।
मुख्य बिंदु:
- हिंदू समाज की सनातन यात्रा:
- हिंदू समाज सदियों से मानव एकता और विश्व कल्याण के लिए कार्यरत रहा है।
- तेजस्वी मातृशक्ति, संतों, धर्माचार्यों, और महापुरुषों के आशीर्वाद से राष्ट्र हर संकट के बावजूद आगे बढ़ता रहा।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना (1925):
- डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए RSS की स्थापना की।
- संघ ने दैनिक शाखाओं के माध्यम से व्यक्ति निर्माण की एक विशिष्ट कार्यपद्धति विकसित की।
- यह राष्ट्र निर्माण का निःस्वार्थ तप बन गया।
- संघ का राष्ट्रव्यापी विस्तार:
- डॉ. हेडगेवार के जीवनकाल में ही संघ का कार्य सम्पूर्ण भारत में फैलने लगा।
- द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी (गोलवलकर जी) के नेतृत्व में संघ का प्रभाव समाज के हर क्षेत्र में बढ़ा।
- संघ के 100 वर्षों का योगदान:
- संघ ने दैनिक शाखा के संस्कारों से समाज का विश्वास और स्नेह अर्जित किया।
- स्वयंसेवकों ने राग-द्वेष से ऊपर उठकर समाज को एकजुट किया।
- समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक योगदान दिया।
- संघ का वैश्विक दृष्टिकोण:
- भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराएं विश्व कल्याण में योगदान दे सकती हैं।
- संघ का मानना है कि धर्म के आधार पर आत्मविश्वास से भरा संगठित जीवन ही हिंदू समाज को उसके वैश्विक दायित्वों के लिए सक्षम बना सकता है।
- भविष्य के संकल्प:
- जात-पात से परे समरस समाज का निर्माण।
- पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाना।
- स्वबोध और नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता।
- भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिकता से युक्त समर्थ राष्ट्रजीवन का निर्माण।
- RSS का लक्ष्य:
- समाज के सभी प्रश्नों और चुनौतियों का समाधान निकालते हुए, विश्व को दिशा देने वाला एक संगठित, समरस और समर्थ भारत बनाना।
- अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु संकल्प लिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा राष्ट्र निर्माण, हिंदू एकता और वैश्विक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रही है। यह संकल्प समाज को एकजुट कर भारत को एक आदर्श राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।