अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान पेटियों से कथित तौर पर चढ़ावा चोरी होने की अफवाहों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्च स्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, ट्रस्ट ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है ताकि तथ्यों की सत्यता सामने आ सके और समाज में फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर विराम लगाया जा सके।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बाद बढ़ी चिंता
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर राम मंदिर की दान पेटियों से कथित चढ़ावा चोरी होने के दावे वायरल हो रहे थे। इन दावों ने श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया था।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर की पवित्रता, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और दान व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की गलत सूचना समाज में भ्रम पैदा कर सकती है। यही वजह है कि ट्रस्ट ने स्वयं आगे बढ़कर जांच की मांग की है।
ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार
ट्रस्ट की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि राम मंदिर में दान चोरी को लेकर फैलाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।
पत्र में कहा गया है, “राम मंदिर में दान चोरी को लेकर सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही बातें तथ्यहीन हैं। सच्चाई सामने लाने और अफवाह फैलाने वालों की पहचान करने के लिए SIT जांच आवश्यक है।”
ट्रस्ट ने यह भी कहा कि जांच से न केवल वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि गलत सूचनाएं फैलाने वाले लोगों को भी बेनकाब किया जा सकेगा।
CM योगी के पास पहुंचा अनुरोध, गृह विभाग करेगा कार्रवाई
मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की है कि ट्रस्ट का अनुरोध प्राप्त हो चुका है और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग पूरे मामले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है और SIT गठन सहित विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
दान प्रक्रिया को बताया गया सुरक्षित और पारदर्शी
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राम मंदिर परिसर में दान संग्रहण और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित और निगरानी आधारित है। मंदिर में सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, निगरानी तंत्र और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, दान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्डिंग, निगरानी और लेखा परीक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। इसके बावजूद ट्रस्ट ने किसी भी प्रकार की शंका को दूर करने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग की है।
आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता पर जोर
राम मंदिर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट और प्रशासन दोनों ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना से श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि SIT जांच गठित होती है तो इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में इस तरह की अफवाहों पर भी रोक लग सकेगी।
फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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