उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में जुटा चुनाव आयोग
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से दिए गए इस्तीफे के बाद अब देश के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद चुनाव आयोग एक्शन मोड में आ गया है। आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।
चुनाव आयोग ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत उसे यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव कराए। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम 1952 और चुनाव नियम 1974 के अंतर्गत पूरी की जाती है। आयोग ने निर्वाचक मंडल की सूची, रिटर्निंग ऑफिसर/सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति और पिछले चुनावों के रिकॉर्ड की समीक्षा का काम शुरू कर दिया है।
Election Commission of India starts preparations relating to the Vice-Presidential Elections, 2025.
On completion of the preparatory activities, the announcement of the Election Schedule to the office of the Vice-President of India will follow as soon as possible, says Election… pic.twitter.com/44DUFeYC7F
— ANI (@ANI) July 23, 2025
कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति का चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम के तहत होता है, जो सामान्य लोकसभा/विधानसभा चुनावों से अलग है। इसमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित व 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सांसद यानी कुल 788 सदस्य मतदान करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव, उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्य विधानसभाओं के विधायक शामिल नहीं होते, लेकिन राज्यसभा के मनोनीत सदस्य इसमें वोट डाल सकते हैं।

उम्मीदवार बनने के नियम क्या हैं?
उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए व्यक्ति को कम से कम 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 सांसदों का समर्थक बनाना जरूरी होता है। साथ ही 15,000 रुपए की जमानत राशि भी जमा करनी होती है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद ही उम्मीदवारों के नाम बैलट पेपर में शामिल किए जाते हैं।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर
जगदीप धनखड़ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की थी और 1989 में झुंझुनू से सांसद बने। उन्हें उसी कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया। 1991 में टिकट कटने के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और 1993 में विधायक बने। 2003 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की। उन्हें 30 जुलाई 2019 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और वहीं से उनका रास्ता उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचा।