भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA): 60 दिनों में संभावित समझौते की उम्मीद
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा है कि वह 60 दिनों के भीतर भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं। इस कदम से अगले 10 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 10 गुना वृद्धि होने की संभावना है।
एफटीए वार्ता की पुनः शुरुआत
- 16 मार्च से चार दिवसीय भारत दौरे पर आए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक शिखर सम्मेलन में यह घोषणा की।
- लगभग 10 वर्षों के बाद भारत और न्यूजीलैंड ने एफटीए वार्ता फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
- इससे पहले, 2010 में दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर चर्चा शुरू की थी, लेकिन 2015 में वार्ता रुक गई थी।
समझौते पर वार्ता के मुख्य मुद्दे
- कृषि उत्पादों पर शुल्क रियायतें:
- न्यूजीलैंड चाहता है कि भारत सेब, कीवी, डेयरी उत्पादों और वाइन पर आयात शुल्क कम करे।
- भारत इस पर सतर्क रहेगा, क्योंकि यह घरेलू किसानों और उत्पादकों को प्रभावित कर सकता है।
- समयसीमा पर भारत का रुख:
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कोई भी मुक्त व्यापार समझौता किसी के सिर पर बंदूक रखकर नहीं किया जाता।
- हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं और कई संवेदनशील मुद्दों को हल किया जा सकता है।
- भारत को सीमित लाभ की आशंका:
- थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार,
- भारत को इस समझौते से सीमित लाभ होगा।
- भारतीय उत्पादों को पहले से ही न्यूजीलैंड में कई वस्तुओं के लिए शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त है।
- न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क 2.3% है, जबकि भारत का औसत आयात शुल्क 17.8% है।
- थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार,
द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति
- 2023-24 में भारत-न्यूजीलैंड व्यापार 87.3 करोड़ डॉलर रहा।
- 2022-23 में यह 1.02 अरब डॉलर था, यानी व्यापार में कुछ गिरावट आई।
- यदि एफटीए पर सहमति बनती है, तो व्यापार में अगले 10 वर्षों में 10 गुना वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष
- भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA वार्ता फिर से शुरू हुई है।
- न्यूजीलैंड 60 दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर का इच्छुक है, लेकिन भारत सभी पहलुओं पर विचार करेगा।
- कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क रियायतें चर्चा का मुख्य बिंदु हैं।
- भारत के लिए व्यापारिक लाभ सीमित हो सकता है, क्योंकि कई उत्पाद पहले से ही न्यूजीलैंड में बिना शुल्क के निर्यात किए जा रहे हैं।
- यदि यह समझौता सफल होता है, तो भारत-न्यूजीलैंड व्यापारिक संबंधों में बड़ा विस्तार संभव है।