नेपाल में एक बार फिर जेन-जेड (Gen-Z) आंदोलन भड़क उठा है, जिसके चलते कई इलाकों में तनाव बढ़ गया है और प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा है। सितंबर 2025 में हुए हिंसक जेन-जेड विद्रोह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया था, जिसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। अब कई महीनों बाद सत्ता समर्थकों और युवा आंदोलनकारियों के बीच फिर से टकराव शुरू हो गया है।
बारा जिले में हालात बिगड़े, कर्फ्यू लागू
बुधवार को स्थिति तब अचानक तनावपूर्ण हो गई, जब बारा जिले के सिमरा क्षेत्र में जेन-जेड समर्थकों और ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल के वफादारों के बीच रैलियों के दौरान सीधी झड़प हो गई। दोनों समूहों ने एक-दूसरे पर पथराव किया, जिससे 10 से अधिक लोग घायल हो गए। इसके बाद प्रशासन ने—
- सिमरा एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में
- कई संवेदनशील स्थानों पर
दोपहर 12:30 से रात 8 बजे तक कर्फ्यू लागू कर दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि कर्फ्यू शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था, क्योंकि माहौल किसी भी समय फिर से हिंसक हो सकता था।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अपील
कार्यवाहक PM सुशीला कार्की ने युवाओं से शांति बनाए रखने और सभी राजनीतिक दलों से “अनावश्यक उकसावे से बचने” की अपील की है। उन्होंने कहा कि—
- मार्च 2026 में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए
- सभी पक्षों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए
- देश को हिंसा से नहीं, स्थिरता से आगे बढ़ना होगा
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आंदोलनकारियों की शिकायतों को सुनेगी, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
नेपाल पुलिस का दावा—स्थिति नियंत्रण में
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता आबी नारायण काफ्ले ने कहा कि गुरुवार को स्थिति काफी हद तक सामान्य है और किसी को गंभीर चोट नहीं लगी है।
हालाँकि, दूसरी तरफ जेन-जेड समर्थकों का आरोप है कि पिछले विद्रोह के दौरान पुलिस ने स्पष्ट रूप से ओली समर्थकों का पक्ष लिया था, और इसी कारण आंदोलनकारियों का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है।
मधेश प्रदेश में भी प्रदर्शन तेज
काठमांडू से लगभग 9 घंटे की दूरी पर स्थित मधेश प्रदेश में भी जेन-जेड का जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने नेताओं को पब्लिक रैलियाँ करने से रोक दिया है, ताकि फरवरी-मार्च 2026 के आम चुनाव से पहले राजनीतिक दलों पर दबाव बनाया जा सके।
हालाँकि काठमांडू में अभी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
उलझन बढ़ी—यूएमएल नेताओं की फ्लाइट कैंसिल
सीपीएन-यूएमएल के वरिष्ठ नेता शंकर पौडेल और महेश बस्नेत बारा जिले में एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन जेन-जेड प्रदर्शनकारियों के विरोध और सुरक्षा कारणों से उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई। इससे साफ पता चलता है कि आंदोलनकारियों का प्रभाव अभी भी काफी अधिक है।
कुल मिलाकर स्थिति
- नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक अस्थिरता खत्म नहीं हुई
- जेन-जेड आंदोलन फिर सक्रिय हो गया है
- सरकार और सुरक्षा बल तनाव को शांत करने की कोशिश में लगे हैं
- आगामी चुनावों से पहले यह आंदोलन नेपाल की राजनीति को फिर से हिलाकर रख सकता है
नेपाल में हालात अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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