गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी GST से सरकारी खजाने में लगातार मजबूती दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 को जारी किए गए प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देश का सकल GST कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर ₹1,94,812 करोड़ हो गया। पिछले साल जून 2025 में GST संग्रह ₹1,71,105 करोड़ रहा था।
जून का यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ के स्तर के बेहद करीब है। मई 2026 में ग्रॉस GST कलेक्शन ₹1,94,184 करोड़ रहा था, यानी जून का संग्रह मई के लगभग बराबर लेकिन थोड़ा अधिक है। अप्रैल 2026 में GST कलेक्शन ₹2.42 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक संग्रह माना गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में GST कलेक्शन की मजबूती का बड़ा कारण आयात से मिलने वाले टैक्स राजस्व में तेज बढ़ोतरी रही। आयातित वस्तुओं से होने वाला सकल GST राजस्व 34.6% बढ़कर ₹60,038 करोड़ हो गया। दूसरी तरफ घरेलू लेन-देन से मिलने वाला सकल GST राजस्व 6.5% बढ़कर ₹1,34,774 करोड़ रहा।
नेट GST रेवेन्यू में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। जून 2026 में नेट GST कलेक्शन 11.2% बढ़कर ₹1,62,377 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल जून में यह ₹1,45,984 करोड़ था। वहीं, कुल GST रिफंड 29.1% बढ़कर ₹32,436 करोड़ हो गया। रिफंड बढ़ने के बावजूद नेट कलेक्शन में दो अंकों की वृद्धि टैक्स बेस और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है।
राज्यवार संग्रह की बात करें तो कुल GST कलेक्शन के लिहाज से महाराष्ट्र ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। वहीं, कुछ राज्यों में सालाना वृद्धि दर बेहतर रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के GST संग्रह में 19% और असम में 17% की वृद्धि दर्ज की गई। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में भी क्रमशः 14%, 12% और 9% की बढ़ोतरी देखने को मिली। दूसरी ओर, तमिलनाडु में 2%, राजस्थान में 5% और मध्य प्रदेश में 5% की गिरावट दर्ज की गई।
GST संग्रह को देश की आर्थिक सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। ज्यादा कलेक्शन का अर्थ आमतौर पर यह होता है कि कारोबार, उपभोग, उत्पादन और टैक्स अनुपालन में सुधार हो रहा है। हालांकि जून 2026 के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि इस बार ग्रोथ का बड़ा हिस्सा घरेलू मांग की तुलना में आयात कर वसूली से आया है।
GST रिफंड को समझना भी जरूरी है। जब कोई कंपनी अपनी टैक्स देनदारी से अधिक कर जमा कर देती है या निर्यात से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए पात्र होती है, तो सरकार वह राशि वापस करती है। इसी राशि को GST रिफंड कहा जाता है। इसलिए ग्रॉस GST कलेक्शन और नेट GST रेवेन्यू अलग-अलग होते हैं।
ग्रॉस GST वह कुल राशि है जो सरकार के पास कर के रूप में जमा होती है। वहीं, रिफंड घटाने के बाद जो राशि बचती है, उसे नेट GST रेवेन्यू कहा जाता है। जून 2026 में ग्रॉस GST कलेक्शन ₹1,94,812 करोड़ रहा, जबकि नेट GST कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ दर्ज किया गया।
GST भारत में 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। इसे आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार माना गया। GST लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के कई अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों को एक ही कर प्रणाली में समाहित किया गया। इसका उद्देश्य “एक देश, एक कर” की दिशा में टैक्स सिस्टम को आसान, पारदर्शी और व्यापार-friendly बनाना था।
GST मुख्य रूप से चार हिस्सों में बंटा होता है। CGST यानी Central GST केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है। SGST यानी State GST राज्यों द्वारा वसूला जाता है। IGST यानी Integrated GST अंतरराज्यीय व्यापार और आयात पर लागू होता है। वहीं, Cess कुछ विशेष वस्तुओं जैसे लग्जरी सामान, तंबाकू या अन्य निर्धारित उत्पादों पर लगाया जाता है।
कुल मिलाकर, जून 2026 का GST कलेक्शन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देता है। आयात राजस्व में तेज उछाल, नेट कलेक्शन में 11.2% वृद्धि और ₹2 लाख करोड़ के करीब पहुंचता मासिक संग्रह यह दिखाता है कि GST सिस्टम परिपक्व हो रहा है। आने वाले महीनों में घरेलू GST संग्रह की रफ्तार पर खास नजर रहेगी, क्योंकि वही उपभोग और उत्पादन की वास्तविक गति को बेहतर ढंग से दिखाएगा।
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