भारतीय मूल की नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 286 दिन बिताने के बाद हाल ही में पृथ्वी पर लौटे। यह यात्रा ऐतिहासिक रही क्योंकि उनकी वापसी में लंबी देरी हुई, जो नासा के अंतरिक्ष अभियानों के इतिहास में दर्ज हो गई।
अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?
जब 1984 में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा था कि “अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?”, तो उन्होंने भावनात्मक जवाब दिया था—
“सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा।”
चार दशक बाद, जब सुनीता विलियम्स से यही सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा—
“अद्भुत, बिल्कुल अद्भुत।”
उन्होंने भारत की सुंदरता का वर्णन करते हुए कहा कि:
- जब भी हिमालय के ऊपर से गुजरे, तो यह दृश्य अविश्वसनीय लगता था।
- भारत को देखकर ऐसा लगता था जैसे कोई लहर उठी हो और भारत में आकर बह रही हो।
- गुजरात और मुंबई के इलाके अंतरिक्ष से और भी निखरकर दिखाई देते थे।
- रात में पूरे भारत में रोशनी का नेटवर्क दिखता था, जो बड़े शहरों से छोटे शहरों तक फैला हुआ था।
उन्होंने यह भी कहा कि हिमालय का दृश्य सबसे अलग और आकर्षक था, और यह हमेशा उनका ध्यान खींचता था।
भारत को बताया महान देश और शानदार लोकतंत्र
- सुनीता विलियम्स ने भारत को एक महान देश और शानदार लोकतंत्र बताया।
- उन्होंने भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रगति की सराहना की और कहा कि वह भारत के प्रयासों का समर्थन करना चाहेंगी।
- उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन (2026 में मानव अंतरिक्ष उड़ान) की प्रशंसा की और इसे अंतरिक्ष में भारत के लिए एक बड़ी छलांग बताया।
भारत आने की इच्छा जताई
- सुनीता विलियम्स ने कहा कि वह जल्द ही भारत आने की उम्मीद कर रही हैं क्योंकि यह उनके “पिता का देश” है।
- उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर भी भारत दौरा करना चाहते हैं।
सुनीता विलियम्स: एक संक्षिप्त परिचय
- जन्म: 19 सितंबर 1965 (ओहियो, अमेरिका)
- भारतीय जड़ें: उनके पिता दीपक नंदकिशोर विलियम्स गुजरात के रहने वाले थे।
- नासा में करियर: उन्होंने 2007 में पहली बार और फिर 2012 में ISS की यात्राएं कीं।
- रिकॉर्ड: वह अब तक कुल 321 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं।
सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष यात्रा भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक प्रेरणा है। भारत के प्रति उनका गहरा भावनात्मक लगाव और उनकी प्रेरणादायक यात्रा, आने वाले समय में भारतीय युवाओं को अंतरिक्ष अन्वेषण में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।