पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूकाबाद में स्थित 125 साल पुराने ऐतिहासिक श्री गुरु सिंह सभा साहिब गुरुद्वारे के कुछ हिस्सों को तोड़े जाने की घटना पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को सिख समुदाय की धार्मिक विरासत और आस्था से जुड़े पवित्र स्थल पर हमला बताया है। भारत ने पाकिस्तान सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त हिस्सों के पुनर्निर्माण की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि भारत को पाकिस्तान के फारूकाबाद में ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा साहिब को तोड़े जाने की खबर मिली है। भारत ने इसे सिखों के पूजनीय धार्मिक स्थल के खिलाफ “बेहद निंदनीय” और “टारगेटेड एक्ट ऑफ वैंडलिज्म” करार दिया है।
भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए और गुरुद्वारे के जिन हिस्सों को तोड़ा गया है, उन्हें जल्द से जल्द फिर से बनाया जाए। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
🚨🇵🇰 पाकिस्तान में 125 साल पुराना गुरुद्वारा ध्वस्त, भारत ने जताया कड़ा विरोध
पाकिस्तान के फारूकाबाद में स्थित 125 वर्ष पुराने श्री गुरु सिंह सभा साहिब गुरुद्वारा (लेहरी) को ध्वस्त किए जाने की घटना पर भारत ने कड़ी निंदा व्यक्त की है।
📌 रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना पाकिस्तान… pic.twitter.com/4tEyeBMuZy
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) July 1, 2026
क्या है पूरा मामला?
श्री गुरु सिंह सभा साहिब गुरुद्वारा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूकाबाद में स्थित है, जिसे पहले मंडी चूहड़काना के नाम से जाना जाता था। यह क्षेत्र सिख इतिहास और विरासत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गुरुद्वारा करीब 125 साल पुराना है और स्थानीय सिख समुदाय के लिए धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व रखता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, 24 जून 2026 की रात कुछ लोगों ने गुरुद्वारे के हिस्से को नुकसान पहुँचाया। घटना के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें इमारत को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखा गया। स्थानीय सिख समुदाय ने इस कार्रवाई का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह मामला जमीन पर कब्जे यानी लैंड माफिया से जुड़ा हो सकता है।
इस घटना के बाद पाकिस्तान में सिख समुदाय के बीच गुस्सा फैल गया। सिख प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और गुरुद्वारे की बहाली की मांग की है।
भारत ने पाकिस्तान को दी नसीहत
भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह अपने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनके पूजा स्थलों को संरक्षण दे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने का सिलसिला थमना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान से सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता पर रोक लगाने की भी मांग की है।
विदेश मंत्रालय के बयान से स्पष्ट है कि भारत इस घटना को केवल एक इमारत के नुकसान के रूप में नहीं, बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक भावना और ऐतिहासिक विरासत पर हमले के रूप में देख रहा है। भारत ने पाकिस्तान से अपेक्षा जताई है कि वह इस मामले में ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करे।
पाकिस्तान में पुनर्निर्माण का आश्वासन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने गुरुद्वारा सिंह सभा के एक हिस्से को तोड़े जाने की पुष्टि की है और इसके पुनर्निर्माण व बहाली का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय प्रशासन ने परिसर को सील कर दिया है और फिलहाल किसी भी निर्माण या तोड़फोड़ गतिविधि पर रोक लगाई गई है।
हालाँकि, सिख समुदाय का कहना है कि केवल आश्वासन काफी नहीं है। समुदाय की मांग है कि जिन लोगों ने इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और गुरुद्वारे को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके पूजा स्थलों के संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह अपने अल्पसंख्यक समुदायों की रक्षा करे और उनकी धार्मिक विरासत को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
फारूकाबाद गुरुद्वारा विवाद अब केवल स्थानीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक सुरक्षा और ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है।
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