गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 पर लोकसभा में बोलते हुए कहा कि दिल्ली में भी कमल खिल गया है और अब आयुष्मान भारत दिल्ली में भी है. अब सिर्फ पश्चिम बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा और आयुष्मान भारत पश्चिम बंगाल में भी आएगा.
उन्होंने कहा कि सरकार में साढ़े तीन साल पहले सहकारिता मंत्रालय बना और सहकारिता के अध्याय में नया इतिहास लिखा गया. उन्होंने कहा कि हर परिवार से एक व्यक्ति सहकारिता से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि इसके विकास के लिए 75 साल से कोई प्रयास नहीं किया गया.
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने साढ़े तीन साल के अंदर ढेर सारा काम किया है. देश में असम्मान सहकारिता आंदोलन चल रहा है. कोई डेटा नहीं था. इस कारण गैप ढ़ूढ़ना मुश्किल था. ढ़ाई साल में सहकारिता का पूरा डेटा बन गया है. उन्होंने कहा कि किस राज्य में कितनी सहकारिता है. इसकी पूरी जानकारी है.
#WATCH | In Lok Sabha, Union HM Amit Shah says "…Lotus has bloomed in Delhi as well. Delhi was left out but now Ayushman Bharat is in Delhi as well. Only West Bengal is left, after elections lotus will bloom there as well and Ayushman Bharat will come to West Bengal too…" pic.twitter.com/gm72ulQkJV
— ANI (@ANI) March 26, 2025
ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
अमित शाह ने कहा कि इस सदन में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पर लगभग 3 घंटे से चर्चा चल रही है. सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जो देश के हर परिवार को जोड़ता है. हर गांव में कोई न कोई इकाई ऐसी है जो सहकारिता के माध्यम से कृषि, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार से जुड़ी हुई है और देश की प्रगति में योगदान दे रही है.
उन्होंने कहा किइस विधेयक के पारित होने के बाद इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, स्वरोजगार और लघु उद्यमिता का विकास होगा, सामाजिक समावेश भी बढ़ेगा और नवाचार और अनुसंधान में नए मानक स्थापित करने के अवसर मिलेंगे…मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं आज इस विधेयक को सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं.
#WATCH | In Lok Sabha, Union Home Minister Amit Shah says "This House has been discussing the Tribhuvan Cooperative University Bill 2025 for almost 3 hours now. Cooperation is a sector that connects every family in the country. There is some unit in every village which is engaged… pic.twitter.com/GurdTolNLK
— ANI (@ANI) March 26, 2025
क्यों रखा गया त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का नाम?
उन्होंने कहा कि इस सहकारी विश्वविद्यालय का विचार आने के बाद जब इसके नामकरण का प्रश्न आया तो इसका नाम त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय रखने का निर्णय लिया गया. त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का नाम सहकारिता के एक ऐसे मॉडल पर आधारित था, जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया और एक ऐसे व्यक्तित्व ने अपना पूरा जीवन गांधी जी के सिद्धांतों पर आधारित सहकारिता के सिद्धांतों पर ईमानदारी के साथ जिया…”