पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भाजपा सरकार ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के लिए ‘जनरल कंसेंट’ (General Consent) बहाल कर दी है। 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के बाद अब सीबीआई राज्य में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSU) और उनसे जुड़े मामलों की जांच बिना अलग-अलग अनुमति लिए कर सकेगी।
यह फैसला करीब आठ साल बाद लिया गया है। इससे पहले नवंबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।
क्या है ‘जनरल कंसेंट’ और क्यों है महत्वपूर्ण?
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत राज्यों को यह अधिकार है कि वे सीबीआई को अपने क्षेत्र में जांच के लिए सामान्य सहमति दें या वापस लें।
जनरल कंसेंट बहाल होने के बाद सीबीआई को हर मामले में राज्य सरकार से अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे केंद्रीय कर्मचारियों, केंद्रीय संस्थानों और उनसे जुड़े भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं तथा अन्य मामलों की जांच तेजी से हो सकेगी।
हालांकि राज्य सरकार के कर्मचारियों और राज्य प्रशासन से जुड़े मामलों में जांच शुरू करने से पहले पश्चिम बंगाल सरकार की लिखित अनुमति अभी भी आवश्यक रहेगी।

टीएमसी सरकार ने 2018 में वापस ली थी सहमति
तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार ने 2018 में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस लेते हुए आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग कर रही है।
इसके बाद पश्चिम बंगाल में सीबीआई को हर नए मामले में अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे कई जांच प्रभावित हुईं और कार्रवाई में देरी हुई।
किन मामलों की जांच पर पड़ सकता है असर?
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला तस्करी, पशु तस्करी, नगरपालिका भर्ती अनियमितता, सहकारी समितियों से जुड़े मामले और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जांच में तेजी आ सकती है।
हाल के महीनों में राज्य सरकार ने कई मामलों में अभियोजन स्वीकृति भी प्रदान की है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान हुआ है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार के फैसले पर बढ़ी चर्चा
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल के महीनों में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनका उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता को मजबूत करना बताया जा रहा है।
राज्य सरकार ने भर्ती घोटालों, सार्वजनिक संस्थानों में कथित अनियमितताओं और विभिन्न प्रशासनिक मामलों की जांच को लेकर भी कई निर्णय लिए हैं।
केंद्र-राज्य समन्वय को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल कंसेंट बहाल होने से केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होगा। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल था जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सीबीआई की सामान्य सहमति वापस ले ली थी। अब इस फैसले को राज्य की जांच प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला
पश्चिम बंगाल सरकार का यह निर्णय आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। समर्थकों का मानना है कि इससे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को मजबूती मिलेगी, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रखता है।
फिलहाल, आठ वर्षों बाद सीबीआई को मिली यह सामान्य सहमति पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
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