नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के आलोक में लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने कई विभागों के पाठ्यक्रमों में महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को लार्ड मैकाले की औपनिवेशिक परंपरा से बाहर निकालकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, स्थानीय भाषाओं और राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ना है।
अंग्रेजी विभाग में रामायण और गीता का समावेश
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परास्नातक अंग्रेजी विभाग के छात्रों को अब रामायण और भगवद गीता के पाठ भी पढ़ाए जाएंगे।
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यह साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से छात्रों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा।
भूगोल विभाग में सैन्य भूगोल और सीमाओं पर फोकस
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6 नए प्रश्नपत्र जोड़े गए हैं जिनमें:
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सैन्य भूगोल (Military Geography)
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सीमा और सुरक्षा भूगोल
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यह बदलाव छात्रों को राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति की बेहतर समझ देगा।
अर्थशास्त्र विभाग: बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य पर जोर
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पाठ्यक्रम में ऊर्जा, आधारभूत संरचना और स्वास्थ्य अर्थशास्त्र जैसे वर्तमान भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय जोड़े गए हैं।
मानवशास्त्र (Anthropology) और दर्शनशास्त्र में बदलाव
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एंथ्रोपोलॉजी विभाग ने भारतीय समाज की नई संरचनाओं को पाठ्यक्रम में स्थान दिया है।
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दर्शनशास्त्र विभाग ने अब भारतीय शिक्षा पद्धति और योग को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बना लिया है।
मातृ भाषा में पढ़ाई की सुविधा
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अब छात्र अपनी मातृ भाषा में विज्ञान जैसे विषय भी पढ़ सकते हैं।
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यह कदम भाषाई समावेशिता और सुगमता से शिक्षा को बढ़ावा देगा।
स्वदेशी ज्ञान और वैश्विक संदर्भ का संतुलन
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विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अब विदेशी लेखकों की सामग्री के साथ—साथ भारतीय लेखकों, आंकड़ों और प्रसंगों को भी समान महत्व मिलेगा।
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यह छात्रों को स्थानीय समझ और वैश्विक दृष्टिकोण दोनों से लैस करेगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह बदलाव नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप है—जहां शिक्षा केवल डिग्री प्राप्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, संस्कृति संरक्षण, और व्यक्तित्व विकास का माध्यम है।