अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सहित 100 देशों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। इस फैसले से भारत को 26% शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जो अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
ट्रम्प प्रशासन का फैसला:
✅ अमेरिका में सभी आयातित सामानों पर न्यूनतम 10% टैरिफ 5 अप्रैल से लागू होगा।
✅ भारत सहित 60 देशों को अधिक शुल्क का सामना करना होगा।
✅ भारत पर 26% तक शुल्क लगाया गया है, जबकि
- ब्रिटेन पर 10%,
- यूरोपीय संघ पर 20%।
✅ अमेरिका का तर्क: भारत अमेरिकी वस्तुओं पर अधिक आयात शुल्क लगाता है, इसलिए ट्रेड बैलेंस सुधारने के लिए यह कदम जरूरी था।
भारत की प्रतिक्रिया:
📌 वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा:
- “अगर ट्रम्प के लिए अमेरिका पहले है, तो पीएम मोदी के लिए भारत पहले है।”
- सरकार टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है।
📌 वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका के इस फैसले के प्रभाव का गहन अध्ययन कर रहा है।
📌 भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर पहले से बातचीत जारी है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है।
VIDEO | Union Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary (@mppchaudhary) on reciprocal tariff announced by US President Donald Trump, says, "For Donald Trump it is 'US First' and for PM Modi it is 'India First'. We will analyse it and see how to tackle it."… pic.twitter.com/8W0a4UFfhE
— Press Trust of India (@PTI_News) April 3, 2025
भारत पर संभावित प्रभाव:
✅ नए टैरिफ से प्रभावित क्षेत्र:
- कृषि उत्पाद
- रसायन और औषधि
- बहुमूल्य पत्थर और आभूषण
- चिकित्सा उपकरण
- इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी
✅ विशेषज्ञों की राय: - भारत को हाई टैरिफ अंतर (Tariff Differential) का सामना करना पड़ेगा।
- भारत के मुकाबले अन्य देश अधिक प्रभावित होंगे, इसलिए भारत की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है।
हाई टैरिफ अंतर (Tariff Differential) विभिन्न क्षेत्रों में:
📌 रसायन और औषधि – 8.6%
📌 प्लास्टिक – 5.6%
📌 वस्त्र और परिधान – 1.4%
📌 हीरे, सोना और आभूषण – 13.3%
📌 लोहा, इस्पात और आधार धातु – 2.5%
📌 मशीनरी और कंप्यूटर – 5.3%
📌 इलेक्ट्रॉनिक्स – 7.2%
📌 वाहन और उनके घटक – 23.1%
भारत की संभावित रणनीति:
✅ टैरिफ राहत के लिए अमेरिका से बातचीत – अगर भारत अमेरिका की चिंताओं का समाधान करता है, तो ट्रम्प प्रशासन शुल्क कम कर सकता है।
✅ व्यापार समझौते की गति बढ़ेगी – भारत और अमेरिका सितंबर-अक्टूबर 2025 तक व्यापार समझौते का पहला चरण पूरा करना चाहते हैं।
✅ भारत नए बाजार खोज सकता है – अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से भारत अन्य देशों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है।
निष्कर्ष:
🔸 ट्रम्प प्रशासन का नया टैरिफ भारत के व्यापार पर असर डाल सकता है, खासकर औषधि, इलेक्ट्रॉनिक्स और आभूषण उद्योग पर।
🔸 भारत सरकार टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और व्यापार समझौते की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
🔸 हालांकि, अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में निर्यात लागत बढ़ सकती है।