दिल्ली पुलिस ने 18 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहे थे। इन घुसपैठियों की मदद करने वाले 8 भारतीय भी पकड़े गए हैं, जो उन्हें जाली कागजात उपलब्ध कराकर नौकरी दिलाने में मदद कर रहे थे।
कैसे हुआ खुलासा?
🔹 गैंग के सरगना मोहम्मद मोइनुद्दीन की दिल्ली के अमीर खुसरो नगर में कंप्यूटर शॉप थी, जहां से वह बांग्लादेशियों के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाता था।
🔹 फर्जी आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनाने के लिए पुल प्रहलादपुर से जुल्फिकार अंसारी, फरमान खान और बुलंदशहर से जावेद को गिरफ्तार किया गया।
🔹 बांग्लादेशियों के लिए छोटी-मोटी नौकरियों की व्यवस्था करने का काम मोहम्मद शाहीन करता था।
🔹 हवाला के जरिए पैसे भेजने का जिम्मा निजामुद्दीन निवासी मनवर हुसैन का था, जो अवैध बांग्लादेशियों से पैसा इकट्ठा कर फॉरेक्स एजेंट के माध्यम से बांग्लादेश के बशीरहाट में निमाई करमाकर और गौरांग दत्ता तक पैसे भेजता था।
फर्जी दस्तावेज और घुसपैठिए
🔹 पुलिस ने 23 वोटर कार्ड, 19 पैन कार्ड, 17 आधार कार्ड, 11 जन्म प्रमाण पत्र और 6 सादे वोटर कार्ड बरामद किए।
🔹 कई घुसपैठियों ने भारतीय महिलाओं से शादी कर ली, जिससे उनके बच्चे सरकारी EWS कोटे का फायदा उठा रहे थे।
🔹 एक घुसपैठिया एयरलाइन में नौकरी तक ले चुका था।
भारत में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों की लिस्ट
✔️ मोहम्मद आलमगीर (2007 में भारत आया) – भारतीय महिला से शादी की, दो बच्चे।
✔️ मोहम्मद जुवेल (2021 में आया)
✔️ मोहम्मद लतीफ खान (2015 में आया)
✔️ नदीम शेख (2021 में आया)
✔️ मिजानुर रहमान और रबिउल (2022 में आए)
✔️ कमरुज्जमान (2014 में आया)
✔️ मोहम्मद रेजाउल (2000 में आया) – बीते दो वर्षों में 22 बार बांग्लादेश गया और वापस आया।
अवैध घुसपैठियों की वापसी शुरू
✅ दिल्ली पुलिस ने 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट कर दिया।
✅ 4 और की जांच जारी, जल्द डिपोर्ट किया जाएगा।
✅ असम से 13 घुसपैठियों को बांग्लादेश भेजा गया, बाकी 50 की जांच चल रही है।
यह मामला दर्शाता है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए न सिर्फ फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में रह रहे हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं और नौकरी के अवसरों का भी लाभ उठा रहे हैं। दिल्ली और असम में अवैध घुसपैठियों को वापस भेजने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।