मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कथित धर्म पहचान छिपाकर विवाह और प्रताड़ना से जुड़े मामले में महिला और उसकी बच्ची के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें महिला को कानूनी रूप से पत्नी न मानते हुए उसके मेंटेनेंस दावे को अस्वीकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब विवाह के रीति-रिवाज हुए और इस संबंध से बच्ची का जन्म हुआ, तो केवल विवाह की वैधता पर सवाल उठाकर महिला के गुजारा भत्ते के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
यह मामला Criminal Revision No. 4518 of 2023 से जुड़ा है, जिसमें हाई कोर्ट ने 22 जून 2026 को आदेश सुनाया। आदेश के अनुसार, महिला और उसकी बच्ची ने फैमिली कोर्ट के 26 अगस्त 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने महिला का मेंटेनेंस दावा खारिज कर दिया था, जबकि बच्ची के लिए केवल ₹2,000 प्रति माह गुजारा भत्ता मंजूर किया था।
हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट की इस सोच को गलत माना। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला को केवल इस आधार पर मेंटेनेंस से वंचित करना कि संबंध को वैध विवाह नहीं माना जा सकता, उचित नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसी सोच महिला को और पीड़ित बनाती है, जो पहले ही प्रतिवादी के हाथों पीड़ा झेल चुकी है।
महिला की ओर से आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी ने फरवरी 2020 में अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर खुद को हिंदू बताकर विवाह किया। आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार, महिला को बाद में आधार कार्ड से पता चला कि प्रतिवादी का नाम गब्बर उर्फ मुस्तफा है और वह बोहरा समुदाय से संबंधित है। महिला ने आरोप लगाया कि सच सामने आने के बाद उसे धमकाया गया, प्रताड़ित किया गया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया।
हाई कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज है कि महिला ने मार्च 2021 में बच्ची को जन्म दिया। महिला के अनुसार, जब उसने दबाव का विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। बाद में वह अपने मायके चली गई, लेकिन आरोप है कि प्रतिवादी ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और शिव मंदिर में जाकर उसके अपहरण की कोशिश की। आदेश में यह भी उल्लेख है कि मंदिर के पुजारी के परिवार को भी धमकाने के आरोप लगाए गए।
इस मामले में इंदौर के द्वारकापुरी थाने में FIR दर्ज होने का भी उल्लेख हाई कोर्ट के आदेश में है। आदेश के अनुसार, प्रतिवादी के खिलाफ IPC की धारा 452, 498-A, 323, 294, 506, 34 और 425 के साथ-साथ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 5 सहपठित धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया।
महिला और बच्ची ने दावा किया था कि वे अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्होंने अदालत में कहा कि प्रतिवादी जिम ट्रेनर के रूप में काम करता है, पर्सनल ट्रेनिंग देता है, प्रोटीन पाउडर और तेल बेचने का कारोबार करता है तथा प्रॉपर्टी ब्रोकरेज से भी कमाई करता है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि प्रतिवादी की कुल मासिक आय करीब ₹1 लाख है और उन्होंने ₹30,000-₹30,000 प्रति माह मेंटेनेंस की मांग की थी।
ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादी की आय को मजदूर की आय मानते हुए लगभग ₹10,000 से ₹12,000 प्रति माह आंका था और बच्ची को सिर्फ ₹2,000 प्रति माह गुजारा भत्ता दिया था। हाई कोर्ट ने इस निर्णय में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इंदौर जैसे शहर में जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने महिला को ₹10,000 प्रति माह और बच्ची को ₹10,000 प्रति माह मेंटेनेंस देने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट ने बच्ची के मेंटेनेंस को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह कर दिया। दोनों को यह राशि आवेदन दाखिल करने की तारीख यानी 8 जनवरी 2022 से देय होगी। इस तरह कोर्ट ने महिला और बच्ची दोनों के लिए आर्थिक राहत का रास्ता साफ किया।
Rediff की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला इंदौर बेंच में कथित “Love Jihad” और विवाह में धोखे के आरोपों से जुड़ा बताया गया है। महिला के वकील विनय जोशी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी ने कथित तौर पर खुद को हिंदू बताकर मंदिर में विवाह संबंधी रस्में निभाईं और बाद में विवाद तब सामने आया जब महिला को उसकी वास्तविक पहचान का पता चला।
इस फैसले का कानूनी महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला ने विवाह जैसी रस्मों और संबंध के आधार पर जीवन बिताया हो और उससे बच्चा जन्मा हो, तो उसे केवल तकनीकी वैवाहिक वैधता के आधार पर मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला Section 125 CrPC के तहत महिला और बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में धर्म पहचान छिपाने, प्रताड़ना, मारपीट, धमकी और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े आरोप आपराधिक मामले का हिस्सा हैं और इन पर अंतिम फैसला संबंधित आपराधिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगा। हाई कोर्ट का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से मेंटेनेंस यानी गुजारा भत्ता से जुड़ा है।
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