वडोदरा, गुजरात:
Maharaja Sayajirao University of Baroda (MS यूनिवर्सिटी) की एक छात्रा के डांस वीडियो को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्रा के वीडियो को Indian National Congress और National Students’ Union of India (NSUI) द्वारा ‘अभद्र’ बताए जाने के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।
विवाद के बीच छात्रा ने सामने आकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने केवल साड़ी पहनकर एक सामान्य बॉलीवुड गाने पर डांस किया था, लेकिन इसे बेवजह बड़ा मुद्दा बना दिया गया। भावुक होते हुए छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे राजनीतिक फायदे के लिए निशाना बनाया जा रहा है।
छात्रा का पक्ष: ‘बेवजह बनाया गया मुद्दा’
छात्रा ने कहा कि उसने कोई आपत्तिजनक हरकत नहीं की थी और यह पहली बार नहीं है जब किसी कार्यक्रम में छात्राएं डांस कर रही हों। उन्होंने माना कि गाने का चयन बेहतर हो सकता था, लेकिन इसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी। इसके बावजूद मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।+
कांग्रेस की “गिद्ध” प्रवक्ता रागिनी और कई कांग्रेस नेताओं ने एक निर्दोष यूनिवर्सिटी छात्रा को कैरेक्टर सर्टिफिकेट बांटना शुरू कर दिया।
यह छात्रा राजनीति या किसी भी राजनैतिक दल से दूर रहने वाली सामान्य लड़की है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने उसे इतना मानसिक प्रताड़ित किया कि मजबूरन… pic.twitter.com/pIY6m7Q50p
— One India News (@oneindianewscom) April 13, 2026
छात्रा ने आरोप लगाया कि उसकी अनुमति के बिना उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उसने Indian National Congress के IT सेल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘महिला सशक्तिकरण पर दोहरा रवैया’
छात्रा ने National Students’ Union of India पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर उसकी आवाज दबाने की कोशिश की गई।
इस मामले में कई सोशल मीडिया यूजर्स और पत्रकार Harsh Vardhan Tripathi ने छात्रा का समर्थन किया है। उन्होंने इस पूरे विवाद को ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि एक छात्रा की गरिमा को नुकसान पहुंचाकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दो शब्दों संदेश के
- किसी भी छात्र या महिला की सहमति के बिना निजी कंटेंट का वायरल होना उसकी गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
- महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ केवल नारे नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है।
“यह मामला दर्शाता है कि समाज और राजनीति दोनों को मिलकर महिलाओं की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवेदनशीलता का सम्मान करना चाहिए।”