नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के पीछे बांग्लादेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस को कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स मिले हैं, जिनसे हिंसा भड़काने की धमकियाँ दी गई थीं। अभी तक 97 सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिनमें से ज़्यादातर पोस्ट बांग्लादेशी IP एड्रेस से किए गए थे।
ऐसे ही एक बांग्लादेशी IP एड्रेस से की गई पोस्ट में कहा गया था कि यह दंगा तो बस एक शुरुआत है। महाराष्ट्र साइबर सेल ने अफ़वाह फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप में 34 सोशल मीडिया अकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, और पुलिस ने अब तक 10 FIR दर्ज की हैं। इसके अलावा, पुलिस ने 140 ऐसी पोस्ट्स को सोशल मीडिया से हटाया है, जिनमें दंगा भड़काने वाली बातें लिखी थीं।
इस बीच, नागपुर के यशोधरानगर में पुलिस ने 2 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागपुर में रह रहे थे। उनके पास नागपुर के निवासी होने के दस्तावेजों के साथ-साथ बांग्लादेशी नागरिक होने के भी दस्तावेज मिले हैं।
पुलिस ने अब तक 84 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें हिंसा का मास्टरमाइंड फहीम शमीम खान भी शामिल है। गिरफ्तार होने वालों में 8 विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जिन्हें जमानत मिल गई थी। गिरफ्तार किए गए 19 आरोपितों को 21 मार्च तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि 17 मार्च को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था, जिसमें 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। दंगे के दौरान हिन्दुओं की दुकानों और घरों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था, और उनकी गाड़ियाँ भी जलाई गई थीं।
इस दंगे के बाद छत्रपति संभाजीनगर में औरंगजेब की कब्र पर ASI ने सुरक्षा बढ़ाई है, और अब यह कब्र पूरी तरह ढक दी गई है। पुलिस ने भी इस कब्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहें और भड़काऊ पोस्ट्स किस प्रकार वास्तविक जीवन में हिंसा को जन्म दे सकती हैं। पुलिस और साइबर सेल की सतर्कता से ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।