भारत और जापान अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊँचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। दोनों देश अब द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और सीधे भारतीय रुपए तथा जापानी येन में भुगतान की व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से दोनों देशों की कंपनियों के लिए लेनदेन आसान होगा, भुगतान लागत घटेगी और व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रूप से चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच हुई वार्ता में आर्थिक सुरक्षा, निवेश, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस, ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बातचीत हुई। दोनों देशों ने AI, मेटल्स और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते भी किए।
Sharing my remarks during the joint press meet with PM Sanae Takaichi of Japan. @takaichi_sanae
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— Narendra Modi (@narendramodi) July 2, 2026
डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और जापान एक ऐसे लोकल करेंसी सेटलमेंट फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत दोनों देशों की कंपनियाँ सीधे रुपए और येन में भुगतान कर सकेंगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद व्यापार भुगतान के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली पर निर्भरता कम हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के साथ सहयोग समझौता करने की तैयारी में है। इस ढाँचे का मकसद द्विपक्षीय व्यापार को सरल बनाना, विदेशी मुद्रा जोखिम कम करना और व्यापारिक भुगतान की प्रक्रिया को अधिक तेज व किफायती बनाना है।
2025 में बनी सहमति, अब अमल की दिशा में कदम
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का विचार नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान जारी भारत-जापान संयुक्त विजन दस्तावेज में दोनों देशों ने भुगतान प्रणालियों में सहयोग बढ़ाने और स्थानीय मुद्रा लेनदेन को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। अब उसी दिशा में औपचारिक कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत ने जुलाई 2022 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रुपए में निपटाने के लिए विशेष रुपी वोस्त्रो अकाउंट की व्यवस्था शुरू की थी। इसके जरिए भारत कई देशों के साथ रुपए में व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। RBI के अनुसार, रुपए में सेटलमेंट मौजूदा विदेशी मुद्रा आधारित व्यवस्था के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में काम करता है।
🇮🇳🇯🇵 PM मोदी का खास स्वागत
नई दिल्ली में भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का स्वागत “नमस्कार और कोन्निचिवा” कहकर किया।
मोदी ने उन्हें “मेरी छोटी बहन” बताते हुए भारत की पहली यात्रा पर खुशी जताई। यह मुलाकात भारत-जापान दोस्ती को… pic.twitter.com/Omucx5EbLi
— One India News (@oneindianewscom) July 2, 2026
भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश
भारत और जापान के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुँचा। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। जापान भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा निवेशक रहा है।
भारत और जापान ने अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन जापानी येन के निजी निवेश का लक्ष्य तय किया है। यह निवेश AI, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, मोबिलिटी, हेल्थकेयर और हाई-टेक डिफेंस जैसे क्षेत्रों में केंद्रित रहने की संभावना है।
हाई-टेक, सेमीकंडक्टर और बुलेट ट्रेन पर फोकस
भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियाँ काम कर रही हैं और इनमें बड़ी संख्या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी है। दोनों देशों की साझेदारी अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर हाई-टेक सेक्टर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस को-डेवलपमेंट तक पहुँच रही है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत-जापान सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। यह परियोजना जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी वित्तीय सहयोग के साथ भारत के आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में अहम भूमिका निभा रही है। जापान को भारत के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में प्रमुख निवेशक बताया है।
रणनीतिक सहयोग भी होगा मजबूत
भारत और जापान का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, क्वाड सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है।
दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए नई रणनीतिक पहल पर जोर दिया है। स्थानीय मुद्रा में व्यापार की व्यवस्था लागू होने पर यह सहयोग और अधिक व्यावहारिक रूप ले सकता है, क्योंकि इससे कंपनियों को मुद्रा विनिमय लागत और डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली की जटिलताओं से राहत मिल सकती है।
भारत-जापान साझेदारी का नया अध्याय
भारत और जापान दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता निवेश, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक तालमेल आने वाले वर्षों में एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
अगर रुपए-येन में सीधे व्यापार की व्यवस्था लागू होती है, तो यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को नई मजबूती देगी, बल्कि भारत की डी-डॉलराइजेशन नीति और रुपए के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकती है।
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