प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से म्यांमार और थाईलैंड में आए भीषण भूकंप के बाद तुरंत प्रतिक्रिया दी है, वह भारत की Neighbourhood First Policy और HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) कमिटमेंट का अहम उदाहरण है।
भूकंप से जुड़ी मुख्य जानकारी:
-
केंद्र: म्यांमार
-
गहराई: 10 किलोमीटर
-
पहला झटका: 6.0 तीव्रता
-
दूसरा झटका: 6.4 तीव्रता (पहले झटके के 12 मिनट बाद)
-
प्रभावित क्षेत्र: म्यांमार और थाईलैंड, खासकर बैंकॉक में इमारतें हिलीं, लोग सड़कों पर भागे
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया:
🔸PM नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर चिंता जाहिर करते हुए कहा:
“म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप से उत्पन्न स्थिति को लेकर चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत सहायता के लिए तैयार है।”
Concerned by the situation in the wake of the Earthquake in Myanmar and Thailand. Praying for the safety and wellbeing of everyone. India stands ready to offer all possible assistance. In this regard, asked our authorities to be on standby. Also asked the MEA to remain in touch…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 28, 2025
🔸 तत्काल तैयारी:
-
भारतीय वायुसेना का C-17 Globemaster विमान स्टैंडबाय पर रखा गया
-
सहायता सामग्री, राहत टीम, मेडिकल सपोर्ट आदि भेजने के लिए अंतिम आदेश का इंतजार
-
NDMA (National Disaster Management Authority) और NDRF (National Disaster Response Force) को भी अलर्ट पर रखा गया
महत्व क्यों रखता है यह कदम?
-
भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) के तहत म्यांमार और थाईलैंड दोनों भारत के महत्वपूर्ण पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार हैं।
-
HADR Diplomacy के जरिए भारत ने पहले भी नेपाल भूकंप (2015), तुर्किये भूकंप (2023) जैसी आपदाओं में फ्रंटफुट पर मदद दी थी।
-
इससे भारत की छवि एक जिम्मेदार और तत्पर वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूत होती है।