प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेक्स फ्रिडमैन के साथ यह पॉडकास्ट संवाद निश्चित रूप से हिंदू दर्शन और जीवनशैली को व्यापक रूप से समझाने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। इसमें उन्होंने उपवास, ध्यान, नाद-ब्रह्म, सनातन धर्म की समग्रता और वैज्ञानिकता को बहुत सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
उनका यह विचार कि हिंदू धर्म कोई पूजा-पद्धति मात्र नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका (Way of Life) है, भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने चरक संहिता और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से उपवास और आत्मसंयम के लाभों को स्पष्ट किया, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए भी आवश्यक हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का चातुर्मास और नवरात्रि उपवास का अनुभव उनके अनुशासन और आध्यात्मिक अभ्यास को दर्शाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य और आत्मसंयम से भी जुड़ी हुई है।
इसके अलावा, नाद-ब्रह्म की अवधारणा पर उनका दृष्टिकोण ध्यान (Meditation) और आंतरिक चेतना की महत्ता को समझाता है। उनकी हिमालय यात्रा का प्रसंग और संत द्वारा सिखाई गई “टप-टप” की ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करने की विधि, ध्यान की गहरी समझ को उजागर करती है।
अंत में, उन्होंने वैदिक मंत्रों के माध्यम से “पूर्णता” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसी सार्वभौमिक प्रार्थनाओं को समझाते हुए हिंदू धर्म की समावेशिता और वैज्ञानिकता को रेखांकित किया।
इस पॉडकास्ट से निश्चित रूप से हिंदू धर्म के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो सकती हैं, और यह वैश्विक स्तर पर भारतीय दर्शन को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां अपनी बातचीत में कुछ मंत्रों का जिक्र भी करते हैं और हिन्दू धर्म को जीनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उसे पूर्णता का अनुभव करा देते हैं। उन्होंने कहा- ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। यानी पूरे जीवन को एक सर्कल के अंदर उस (ब्रह्म) ने रखा हुआ है। पूर्णता ही सर्वस्व है, पूर्णता प्राप्त करने का विषय है। उसी प्रकार से हमारे यहां (हिन्दू परंपरा में) कल्याण की बात कही गई है, सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। यानी सबका भला हो, सबका सुख हो, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग भवेत्। अत: इन सभी मंत्रों में भी लोगों के सुख की बात है, लोगों के आरोग्य का बात है और फिर करें क्या ? ॐ शांतिः, शांतिः, शांतिः।
हमारे हर मंत्र के बाद आएगा, “Peace, Peace, Peace” यानी ये जो धार्मिक संस्कार (Rituals) भारत में डेवलप हुए हैं, वो हजारों सालों की ऋषियों की साधना से निकले हुए हैं। लेकिन वे जीवन तत्व से जुड़े हुए हैं। वैज्ञानिक तरीके से रखे हुए हैं। वास्वत में यही भारत है, जिसके बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सभी को बहुत सहजता से व्यापक अर्थों में समझाने का प्रयास किया है।
Here's my conversation with @narendramodi, Prime Minister of India.
It was one of the most moving & powerful conversations and experiences of my life.
This episode is fully dubbed into multiple languages including English and Hindi. It's also available in the original (mix of… pic.twitter.com/85yUykwae4
— Lex Fridman (@lexfridman) March 16, 2025
उपवास मन, बुद्धि को ऊंचाई पर ले जाने का तरीका
पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारे शास्त्रों में शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा, मनुष्यत्व को किस प्रकार से ऊंचाई पर ले जाएं? उसके बारे में चर्चा भी है और रास्ता भी बताया गया है. उसमें एक उपवास भी है. उपवास जीवन को गढ़ने में काम आता है. उपवास के बाद आपकी जितनी इन्द्रियां हैं, ये इतनी जागरूक हो जाती हैं कि आपको पानी का भी स्मैल मिलेगा. चाय-कॉफी, फूल की भी स्मैल आएगी”.
उपवास से आपकी सारी इन्द्रियां बहुत सक्रिय हो जाती हैंः पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि उपवास से आपकी सारी इन्द्रियां बहुत सक्रिय हो जाती हैं. उनकी क्षमता अनेक गुणा बढ़ जाती है. मैं इसका अनुभवी हूं. उपवास आपके विचार प्रवाह को नयापन देते हैं. मेरा अनुभव है कि उपवास से आप आउट ऑफ बॉक्स जाकर काम कर पाते हैं.
‘खाना छोड़ देना उपवास नहीं, यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया’
उपवास की प्रक्रिया के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि ज्यादातर लोगों का लगता है कि उपवास का मतलब है कि खाना छोड़ देना. किसी व्यक्ति को किसी कारणवश खाना नहीं मिला, पेट में कोई अन्न नहीं मिला तो उसे उपवास कैसे मानेंगे? उन्होंने आगे कहा कि उपवास एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है.
उपवास से पहले कैसे बॉडी को क्लिन अप करते हैं पीएम मोदी
उपवास के अपने अनुभव के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि उपवास से पहले मैं 5-6 दिन तक बॉडी को इंटरनली क्लिन अप करने के लिए योगा, आयुर्वेद की जितनी प्रक्रियाएं होती हैं, उसे करता हूं. फिर उपवास शुरू करने से पहले बहुत पानी पीता हूं. जिसके बाद मेरा बॉडी रेडी हो जाता है. फिर उपवास शुरू करता हूं. मेरे लिए उपवास एक अनुशासन है.
पीएम मोदी ने कब किया था अपना पहला उपवास
अपने पहले उपवास के बारे में पीएम मोदी ने बताया कि स्कूल एज में महात्मा गांधी की गो-रक्षा को लेकर जो इच्छा थी, उसको लेकर एक आंदोलन चलता था. सरकार कोई कानून नहीं बना रही थी. उस समय पूरे देश में एक दिन के सार्वजनिक उपवास का एक कार्यक्रम था. मेरा मन कर गया कि मुझे उपवास में बैठना चाहिए. यह मेरे जीवन का पहला उपवास था.
कई प्रयोगों से मैंने खुद को गढ़ने का काम कियाः पीएम मोदी
अपने पहले उपवास के बारे में पीएम मोदी ने आगे कहा कि उतनी छोटी उम्र में मैं उपवास में बैठा. मुझे ना तो भूख लगी. फिर मैंने धीरे-धीरे खुद को कई प्रयोगों से गढ़ने का काम किया. दूसरी बात है कि मेरी एक्टिवी कभी बंद नहीं होती. कभी-कभी तो लगता है कि ज्यादा ही करता हूं. उपवास के दौरान यदि कहीं विचार व्यक्त करना होता है तो मुझे आश्चर्य होता है कि उस दौरान मेरे वो विचार कहां से आते हैं.