प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद अब श्रीलंका की राजधानी कोलंबो की ओर रुख किया है। बिम्सटेक सम्मेलन के दौरान भारत ने थाईलैंड के साथ कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए, वहीं बांग्लादेश के कार्यवाहक राष्ट्रपति मोहम्मद यूनुस के साथ द्विपक्षीय बैठक में सीमा पार तनाव को कम करने पर ज़ोर दिया।
भारत-श्रीलंका रक्षा सहयोग: ऐतिहासिक समझौते की ओर
प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान ‘रक्षा सहयोग’ से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
यदि यह समझौता होता है, तो यह भारत-श्रीलंका के बीच रक्षा संबंधों में 35 वर्षों के बाद एक नई शुरुआत होगी। 1989 में भारतीय शांति सेना (IPKF) की वापसी के बाद यह पहला बड़ा रक्षा सहयोग होगा।
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी: भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रक्षा समझौता हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ भारत की सक्रिय रणनीति का हिस्सा है।
भारत को श्रीलंका के साथ सुरक्षा नेटवर्क मजबूत करने की आवश्यकता तब और महसूस हुई जब:
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अगस्त 2022 में चीनी सैटेलाइट ट्रैकिंग जहाज ‘युआन वांग’ ने हंबनटोटा बंदरगाह पर लंगर डाला।
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अगस्त 2023 में एक और चीनी युद्धपोत कोलंबो बंदरगाह पर पहुँचा।
इन घटनाओं ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया था।
“पड़ोसी पहले” नीति के केंद्र में श्रीलंका
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा को “रणनीतिक, निवेश, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक साझेदारी को मज़बूत करने वाली यात्रा” बताया।
उन्होंने यह भी कहा:
“श्रीलंका हमारी ‘पड़ोसी पहले’ नीति का अभिन्न अंग है। हमारे संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और यह यात्रा द्विपक्षीय विश्वास और सहयोग को एक नई ऊंचाई तक ले जाएगी।”
भारत-बांग्लादेश संबंधों में संतुलन की कोशिश
बैंकॉक में बांग्लादेश के कार्यवाहक राष्ट्रपति मोहम्मद यूनुस के साथ द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार मुद्दों पर अनावश्यक बयानबाजी से बचने की सलाह दी। यह टिप्पणी हाल के कुछ बांग्लादेशी नेताओं के बयानों के संदर्भ में थी, जो भारत विरोधी रुख लिए हुए थे।
भविष्य की दिशा: संपर्क, निवेश और रणनीतिक संरेखण
पीएम मोदी की श्रीलंका यात्रा में जिन क्षेत्रों पर ज़ोर होगा:
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रणनीतिक निवेश (बंदरगाह, ऊर्जा, रेलवे)
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भारत-श्रीलंका कनेक्टिविटी (समुद्री और हवाई)
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डिजिटल सहयोग और स्वास्थ्य सेवाएं
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बौद्ध विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति
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रक्षा प्रशिक्षण और उपकरण साझा कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को दक्षिण एशिया में भारत की स्थायी रणनीतिक पकड़ और सुरक्षा साझेदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। यदि रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह भारत को हंबनटोटा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रत्यक्ष सहयोगी भूमिका में लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।