प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का BIMSTEC शिखर सम्मेलन में दिया गया संबोधन न केवल क्षेत्रीय सहयोग को गहराई देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत की “Neighbourhood First” और “Act East” नीति का भी महत्वपूर्ण विस्तार है।
पीएम मोदी के प्रमुख प्रस्ताव और घोषणाएं – BIMSTEC 2025 सम्मेलन
1. UPI को BIMSTEC देशों से जोड़ने का प्रस्ताव
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UPI (Unified Payments Interface) को BIMSTEC सदस्य देशों (जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार आदि) की डिजिटल भुगतान प्रणालियों से जोड़ने का सुझाव।
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इससे सीमापार लेन-देन, व्यापार, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में जबरदस्त सहूलियत होगी।
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भारत पहले ही सिंगापुर, भूटान, नेपाल, UAE आदि के साथ UPI लिंक कर चुका है—BIMSTEC के साथ यह अगला तार्किक कदम है।
2. BIMSTEC चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना
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क्षेत्रीय व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक स्थायी व प्रभावी व्यापारिक संस्था बनाने की जरूरत पर जोर।
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साथ ही हर साल BIMSTEC व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव भी, जिससे निजी क्षेत्र को भी जोड़ा जा सके।
3. ‘बिम्सटेक उत्कृष्टता केंद्र’ (Centre of Excellence) – आपदा प्रबंधन हेतु
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म्यांमार और थाईलैंड में हाल ही में आए भूकंप पर शोक जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत में एक साझा आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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इसमें आपदा तैयारी, राहत, पुनर्वास और तकनीकी सहयोग पर ज़ोर होगा।
4. BIMSTEC को “सेतु” के रूप में स्थापित करना
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पीएम मोदी ने BIMSTEC को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच पुल (bridge) बताया।
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यह संगठन क्षेत्रीय संपर्क, लचीलापन और समृद्धि के लिए मजबूत मंच बनता जा रहा है।
5. साझा सुरक्षा और समुद्री सहयोग
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हिंद महासागर को मुक्त, संरक्षित और सुरक्षित बनाए रखना सभी की प्राथमिकता है।
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समुद्री परिवहन समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया, जो माल-ढुलाई, समुद्री व्यापार और संपर्क को गति देगा।
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साथ ही:
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साइबर अपराध,
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आतंकवाद,
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ड्रग और मानव तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर ज़ोर।
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6. गृह मंत्रियों का संस्थागत संवाद तंत्र
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गृह मंत्रियों की बैठक को संस्थागत रूप देने की सराहना की और इसकी पहली बैठक भारत में आयोजित करने की पेशकश।
BIMSTEC क्या है?
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BIMSTEC = Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation
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सदस्य देश: भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल, भूटान
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स्थापना: 1997
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उद्देश्य: बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाना
इस सम्मेलन की भारत के लिए रणनीतिक अहमियत
क्षेत्र | योगदान |
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डिजिटल डिप्लोमेसी | UPI के जरिए भारत क्षेत्रीय फिनटेक लीडर बन सकता है |
आर्थिक नीति | व्यापार, टूरिज़्म, MSMEs को नई ऊर्जा मिलेगी |
रणनीतिक सहयोग | भारत का प्रभाव चीन के मुकाबले क्षेत्रीय संतुलन बनाने में मदद करेगा |
सुरक्षा | हिंद महासागर में भारत की भूमिका और नौसैनिक सहयोग को बल मिलेगा |