प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 मार्च को नागपुर दौरा कई राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर, जब यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के नजदीक हो रहा है और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मोदी और मोहन भागवत पहली बार एक साथ मंच साझा करेंगे।
मुख्य बिंदु:
- RSS मुख्यालय और हेडगेवार स्मृति भवन का संभावित दौरा – यह संगठन के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को सम्मान देने के रूप में देखा जा सकता है।
- दीक्षाभूमि जाने की संभावना – डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने वाली जगह का दौरा दलित समुदाय को संदेश देने के रूप में भी देखा जा सकता है।
- माधव नेत्रालय का भूमि पूजन – यह प्रधानमंत्री के सामाजिक सेवा कार्यों को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
- RSS का 100वां वर्ष – संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने में एक साल बाकी है, और यह दौरा संघ-सरकार के संबंधों को और मजबूत करने का संकेत हो सकता है।
- राजनीतिक मायने – लोकसभा चुनाव 2024 में BJP की बड़ी जीत के बाद, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में संघ की भूमिका को और मजबूत करने की रणनीति बन सकती है।
सियासी प्रभाव:
- महाराष्ट्र में BJP और MVA (महाविकास अघाड़ी) के बीच टकराव – PM मोदी का RSS मुख्यालय जाना हिंदुत्व कार्ड को और धार दे सकता है।
- दलित और OBC समुदाय को संदेश – दीक्षाभूमि दौरे से मोदी सरकार सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
- RSS-भाजपा संबंधों की मजबूती – 2025 में RSS के 100 साल पूरे होने पर बड़े आयोजनों की तैयारी भी इस दौरे का एक मकसद हो सकता है।