प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखा है। पीएम मोदी ने यह पत्र बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस (26 मार्च, 2025) के मौके पर लिखा है। पीएम मोदी ने कहा है कि 1971 का मुक्तियुद्ध अभी भी दोनों देशों के रिश्तों का मार्गदर्शक है। उन्होंने दोनों देशों के बीच ‘चिंताओं’ को समझने की बात कही है।
पीएम मोदी ने लिखा, “मैं बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आपको और बांग्लादेश के लोगों को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदानों का प्रमाण है, इसने हमारी हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शन का प्रकाश बनी हुई है।”
पीएम मोदी ने कहा कि संग्राम की यह भावना लगातार दोनों देशों के लोगों को फायदा पहुँचा रही है। पीएम मोदी ने आगे लिखा, “हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं तथा एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस पर पीएम मोदी के साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने भी दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते की वकालत की है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के अगस्त, 2024 में सत्ता से हटने के बाद यह दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 26 मार्च, 1971 को ही बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान और उनके साथी नेताओं ने पाकिस्तान से आजादी का ऐलान किया था। इसके बाद दिसम्बर, 1971 तक युद्ध चला था। भारत ने दिसम्बर में पाकिस्तान की फ़ौज से आत्मसमर्पण करवाया था। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान ही बांग्लादेश बना था।
हाल ही में बांग्लादेश विदेश मंत्रालय की तरफ से मोहम्मद यूनुस और पीएम मोदी के बीच मुलाक़ात के लिए भी प्रयास किया गया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने यह समय थाईलैंड में होने वाली BIMSTEC समिट के लिए माँगा था। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से अभी इस पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।
थाईलैंड में यह समिट 1 अप्रैल-5 अप्रैल के बीच होनी है। यह पहला मौक़ा होगा जब पीएम मोदी और सलाहकार यूनुस एक ही मंच साझा करेंगे। हालाँकि, दोनों नेताओं के बीच इस सम्मेलन से इतर कोई बातचीत होगी या नहीं, या स्पष्ट नहीं है।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से भारत का कोई भी बड़ा नेता नहीं गया है। भारत की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिसरी एक बार बांग्लादेश गए हैं। भारत लगातार बांग्लादेश पर सत्ता परिवर्तन के बाद हिन्दुओं पर हमला करने वालों पर सख्ती करने की अपील करता आया है। बांग्लादेश कहता है कि उसके देश में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों की वर्तमान स्थिति:
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सत्ता परिवर्तन के बाद तनाव – प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में ठंडक आ गई है।
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हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले – भारत लगातार बांग्लादेश से यह अपील करता रहा है कि वह हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे, जबकि बांग्लादेश इसे स्वीकार करने से इनकार करता है।
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राजनयिक संवाद की कमी – सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक भारत की ओर से कोई बड़ा नेता बांग्लादेश नहीं गया है। केवल विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वहां की यात्रा की थी।
आगे की संभावनाएँ:
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BIMSTEC सम्मेलन में संभावित बैठक – अगर पीएम मोदी और यूनुस की मुलाकात होती है, तो यह दोनों देशों के संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने की शुरुआत हो सकती है।
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भारत की कूटनीतिक रणनीति – भारत संभवतः बांग्लादेश के नए प्रशासन के साथ धीरे-धीरे संवाद बढ़ाएगा, लेकिन हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दबाव बनाए रखेगा।
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बांग्लादेश की रणनीति – बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भारत के साथ संबंध सुधारने की इच्छुक दिख रही है, लेकिन चीन और पाकिस्तान के प्रभाव को भी संतुलित करना चाहेगी।