प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 के पारित होने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
विधेयक से पारदर्शिता को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वक्फ प्रणाली में दशकों से पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रही है, जिससे खासकर मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुसलमानों और पसमांदा समुदाय को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि नए कानून वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता लाएंगे और लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे।
Gratitude to all Members of Parliament who participated in the Parliamentary and Committee discussions, voiced their perspectives and contributed to the strengthening of these legislations. A special thanks also to the countless people who sent their valuable inputs to the…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 4, 2025
मजबूत और समावेशी भारत की दिशा में कदम
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हर नागरिक की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उन सभी सांसदों को धन्यवाद दिया जिन्होंने संसदीय चर्चाओं और समिति की बैठकों में योगदान दिया।
राज्यसभा में देर रात तक चर्चा, विधेयक पारित
- राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को 95 के मुकाबले 128 मतों से मंजूरी मिली।
- लोकसभा ने इसे बुधवार देर रात करीब दो बजे पारित किया था।
- विधेयक पर 13 घंटे से अधिक चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष द्वारा लाए गए कई संशोधनों को खारिज कर दिया गया।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू का बयान
- 2006 में देश में 4.9 लाख वक्फ संपत्तियां थीं, जिनकी कुल आय मात्र 163 करोड़ रुपये थी।
- 2013 के संशोधन के बाद भी आय सिर्फ तीन करोड़ रुपये बढ़ी।
- आज देश में कुल 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं।
- सरकार वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन नहीं करती और इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
विपक्ष के संशोधन खारिज
सरकार ने कहा कि यह विधेयक गरीब और वंचित मुसलमानों के सशक्तिकरण में सहायक होगा और इसमें किसी अन्य समुदाय का हस्तक्षेप नहीं होगा। विपक्ष द्वारा उठाई गई भ्रांतियों को सरकार ने निराधार बताया।
नए कानून का उद्देश्य
- वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- गरीब और पसमांदा मुसलमानों को अधिक लाभ पहुंचाना।
- महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना।
- अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को रोकना।
विधेयक के पारित होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे समावेशी विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि इससे लंबे समय से हाशिए पर खड़े समुदायों को न्याय मिलेगा।