प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत देशभर में क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के प्रयास तेज हो गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर लोगों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।
भारत के टीबी उन्मूलन प्रयास – प्रमुख बिंदु:
- गुजरात सबसे आगे:
- नीति आयोग के अनुसार, गुजरात ने टीबी उन्मूलन लक्ष्य का 95% तक हासिल कर लिया है।
- यह भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे आगे चल रहा है।
- मेघालय की अनूठी पहल:
- राज्य सरकार ने 4500 टीबी मरीजों को गोद लिया है।
- ‘यूनिवर्सल निक्षय मित्र’ योजना के तहत मरीजों को पोषण और बेहतर देखभाल दी जा रही है।
- पूर्वी खासी हिल्स जिले की रिडालिन शुलाई, जो एमडीआर-टीबी से पीड़ित थीं, अब एक फेफड़े से जीवित रहते हुए भी स्वस्थ जीवन जी रही हैं।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अपील:
- टीबी की शीघ्र पहचान, इलाज और रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत।
- समाज के सभी वर्गों को मिलकर टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने का आह्वान।
- ‘निक्षय मित्र’ कार्यक्रम:
- सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने यह पहल शुरू की।
- निजी संगठनों और सिविल सोसाइटी की मदद से टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण और देखभाल दी जा रही है।
भारत का टीबी उन्मूलन लक्ष्य:
- प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य रखा है।
- यह लक्ष्य वैश्विक 2030 के लक्ष्य से 5 साल पहले पूरा करने की महत्वाकांक्षा दर्शाता है।
- टीबी के कारण, लक्षण और रोकथाम पर व्यापक जागरूकता और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
टीबी दिवस का महत्व:
- 24 मार्च को डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा टीबी के जीवाणु की खोज (1882) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- इसका उद्देश्य टीबी के बारे में जनजागरूकता बढ़ाना, नीति-निर्माण को प्रोत्साहित करना और रोकथाम के प्रयासों को तेज करना है।
भारत में टीबी उन्मूलन के प्रयास सरकारी योजनाओं, निजी भागीदारी और जागरूकता अभियानों से आगे बढ़ रहे हैं। गुजरात और मेघालय जैसे राज्यों के सकारात्मक उदाहरण दर्शाते हैं कि अगर सभी स्तरों पर प्रयास किए जाएं, तो टीबी को 2025 तक हराया जा सकता है।