जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंक-समर्थक नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए श्रीनगर में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया है, जिसके तहत कई मदरसों, मस्जिदों और मजहबी संस्थानों में छापेमारी की गई। यह कार्रवाई उस व्यापक सुरक्षा ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसकी तीव्रता दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए बम धमाके के बाद और बढ़ा दी गई है। इस हमले में 14 लोगों की मौत हुई थी, और जांच में एक कथित “व्हाइट कॉलर मॉड्यूल” का पता लगा था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े नेटवर्क, समर्थकों और फंडिंग चैनलों की खोज को तेज कर दिया है।
अब तक पुलिस दो मजहबी प्रचारकों—शोपियाँ के मौलवी इरफान और हरियाणा के मेवात के मौलवी इश्तियाक—को गिरफ्तार कर चुकी है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। अधिकारियों के अनुसार तलाशी अभियान श्रीनगर के सभी जोन में एक साथ चलाया गया, जिसमें पुलिस टीमों के साथ कार्यपालक मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाह भी शामिल रहे ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी रूप से वैध बनी रहे। छापों के दौरान डिजिटल उपकरण, दस्तावेज़ और अन्य संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है जिन्हें आगे की जांच में प्रयोग किया जाएगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल सीमित छापेमारी तक नहीं रुकेगा, बल्कि उन हर स्थान और व्यक्ति तक पहुँचेगा, जिन पर आतंकवाद, कट्टरपंथ या उसके फंडिंग नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य श्रीनगर में मौजूद आतंकी समर्थन तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करना है, ताकि किसी भी संभावित साजिश या अस्थिरता को समय रहते रोका जा सके।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel