विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रायसीना डायलॉग में वैश्विक व्यवस्था की असमानताओं और संयुक्त राष्ट्र (UN) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा 1948 से अवैध रूप से कब्जाए गए जम्मू-कश्मीर के हिस्से का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे लंबे अवैध कब्जे को सहन किया, लेकिन इसे आक्रमण की बजाय एक “विवाद” बना दिया गया।
मुख्य बिंदु:
🔹 संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर वैश्विक नियम समान रूप से लागू नहीं होते – जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हमलावर और पीड़ित को एक ही श्रेणी में रखा जाता है, जो अन्यायपूर्ण है।
🔹 UN प्रणाली पर सवाल – उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें एक मजबूत, लेकिन निष्पक्ष UN की जरूरत है, जहां वैश्विक नियम समान रूप से लागू किए जाएं।
🔹 पाकिस्तान का संदर्भ – जयशंकर ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा कि भारत ने अपने पड़ोस में देखा है कि खतरा पैदा करने के लिए किसी देश का बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि छोटे देश भी अस्थिरता फैलाने में माहिर हैं।
🔹 तालिबान और पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंड – जयशंकर ने पश्चिमी देशों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने अलग-अलग समय में तालिबान के प्रति अलग-अलग रवैया अपनाया, जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की स्थिरता पर सवाल खड़ा करता है।
🔹 नई वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता – जयशंकर ने कहा कि पिछले आठ दशकों की वैश्विक व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है क्योंकि आज वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है।
भारत का रुख
🔸 जयशंकर की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि भारत एक निष्पक्ष और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहा है।
🔸 भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए वैश्विक असमानताओं को उजागर कर रहा है।
🔸 भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के मुद्दे पर दोहरे मानदंडों का विरोध कर रहा है, खासकर पाकिस्तान द्वारा कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के संदर्भ में।
जयशंकर की यह टिप्पणी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और नई विश्व व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती है।