राजस्थान पुलिस की CID इंटेलिजेंस विंग ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित फंडिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए रफीक चंद शेख को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पिछले करीब चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और भारत में जासूसी गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध लोगों तक पैसे पहुँचाने का काम कर रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रफीक चंद शेख महाराष्ट्र के औरंगाबाद/छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र का रहने वाला है। राजस्थान CID ने उसे 30 जून 2026 को गिरफ्तार किया। जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ISI हैंडलर के निर्देश पर अलग-अलग बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करता था, ताकि रकम के असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
राजस्थान CID इंटेलिजेंस लंबे समय से पाकिस्तान से जुड़े जासूसी और फंडिंग नेटवर्क पर नजर रख रही थी। जांच के दौरान एजेंसियों को कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली, जिनका संबंध भारत में सक्रिय संदिग्ध लोगों से बताया जा रहा है। इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सोशल मीडिया संपर्कों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।
जांच आगे बढ़ने पर एजेंसियों को रफीक चंद शेख की भूमिका संदिग्ध लगी। शुरुआती जांच में सामने आया कि उसकी पहचान सोशल मीडिया के जरिए एक पाकिस्तानी ISI हैंडलर से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और फिर कथित तौर पर उसे भारत में पैसों के लेनदेन का काम सौंपा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस काम के बदले रफीक को कमीशन भी मिलता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने केवल अपने नाम से ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों के नाम पर भी कई बैंक खाते खुलवाए थे। पाकिस्तान से आने वाली रकम पहले इन खातों में भेजी जाती थी और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती थी। एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके से पैसे के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को छिपाने की कोशिश की गई।
इस मामले की जांच में बड़ा सुराग जनवरी 2026 में मिला था। राजस्थान CID ने उस समय जैसलमेर के झबराराम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में तैनात MTS कर्मचारी सुमित कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों पर भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी हैंडलरों को भेजने का आरोप है। यह मामला Official Secrets Act, 1923 के तहत दर्ज जांच से जुड़ा बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, झबराराम और सुमित कुमार के खातों में संदिग्ध तरीके से पैसे पहुँचे थे। इन लेनदेन की जांच करने पर रकम की कड़ी रफीक चंद शेख तक पहुँची। इसके बाद CID ने आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाए और कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
CID अब रफीक चंद शेख के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों, एटीएम कार्ड, डिजिटल वॉलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। उसके कॉल रिकॉर्ड, चैट, सोशल मीडिया संपर्क और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वह पाकिस्तान में किस-किस व्यक्ति से संपर्क में था और भारत में किन लोगों को फंडिंग कर रहा था।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले तत्वों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संदिग्ध लेनदेन की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ या बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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