योगी आदित्यनाथ के हालिया बयानों से यह स्पष्ट है कि उनकी सरकार कानून और व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है, खासकर धार्मिक गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर। उनके बयान के कुछ प्रमुख बिंदु:
1. सड़कों पर नमाज अदा करने पर सख्ती
- सीएम योगी ने प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी का समर्थन किया और दोहराया कि सड़कें यातायात के लिए होती हैं, न कि धार्मिक आयोजनों के लिए।
- उन्होंने हिंदुओं के धार्मिक अनुशासन की मिसाल देते हुए कहा कि महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन के बावजूद कोई कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हुई।
- सरकार का रुख स्पष्ट है—धार्मिक स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन वह सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा नहीं बननी चाहिए।
2. वक्फ बोर्ड और संपत्तियों पर योगी का हमला
- वक्फ (संशोधन) विधेयक के विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि क्या वक्फ संपत्तियों का उपयोग मुस्लिम समाज के वास्तविक कल्याण के लिए किया गया है?
- वक्फ बोर्डों को “व्यक्तिगत स्वार्थ और लूट-खसोट के अड्डे” बताते हुए उन्होंने कहा कि यह जबरन सरकारी संपत्तियों पर कब्जे का जरिया बन चुका है।
- योगी ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्डों में सुधार समय की जरूरत है और इससे मुस्लिम समाज को भी लाभ होगा।
3. बुलडोजर एक्शन पर सफाई
- उन्होंने बुलडोजर नीति को “उपलब्धि” नहीं, बल्कि “आवश्यकता” बताया।
- बुलडोजर का उपयोग अवैध अतिक्रमण हटाने और बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए किया जा रहा है।
- उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की बुलडोजर नीति पर सुप्रीम कोर्ट की कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं आई है, बल्कि इसे सराहा गया है।
4. महाकुंभ से अनुशासन की सीख लेने की अपील
- मेरठ में सड़कों पर नमाज अदा करने को लेकर हुए विवाद पर योगी ने कहा कि जो लोग फैसले का विरोध कर रहे हैं, उन्हें महाकुंभ से अनुशासन सीखना चाहिए।
- उन्होंने 66 करोड़ श्रद्धालुओं के महाकुंभ में शांतिपूर्ण आयोजन का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक अनुशासन होना चाहिए।
सियासी और प्रशासनिक असर
- सरकार का साफ संदेश है कि धार्मिक स्वतंत्रता को कानून और व्यवस्था से ऊपर नहीं रखा जाएगा।
- वक्फ संपत्तियों की जांच और अतिक्रमण हटाने की मुहिम आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
- बुलडोजर नीति का जारी रहना तय है, जिससे योगी सरकार की “कानून का राज” वाली छवि और मजबूत होगी।
- यह मुद्दे 2024 लोकसभा चुनाव और 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के एजेंडे का हिस्सा बन सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ के इन बयानों से साफ है कि उनकी सरकार सख्त प्रशासनिक नीतियों और अनुशासन आधारित शासन की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था पर उनके मजबूत रुख को दर्शाता है।