सोमवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.90 पर पहुंचकर 9 जनवरी 2025 के बाद से अपने सबसे उच्चतम स्तर को छुआ। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 85.93 पर खुला और फिर 85.86 तक पहुंचा, जो पिछले दिन के मुकाबले 12 पैसे ज्यादा है। शुक्रवार को रुपया 38 पैसे मजबूत होकर 85.98 पर बंद हुआ था।
रुपये की मजबूती के कारण
-
विदेशी निवेश: विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुद्ध रूप से 7,470.36 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस निवेश का कारण FTSE मार्च समीक्षा और मजबूत फंड जुटाने की गतिविधियां थीं।
-
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने रुपये को सहारा दिया है।
-
डॉलर इंडेक्स में गिरावट: डॉलर इंडेक्स में गिरावट और विदेशी निवेश के सुधार के कारण मार्च में अब तक रुपया 1.83% मजबूत हुआ है।
रुपया की मजबूती के बावजूद जोखिम
-
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: रुपया अभी भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, खासकर जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं।
-
बाहरी झटके: विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाओं के चलते रुपये को बाहरी झटके का सामना हो सकता है, जिससे उसकी मजबूती में रुकावट आ सकती है।
निरंतर प्रदर्शन
रुपया इस महीने की सबसे अच्छी प्रदर्शन करने वाली प्रमुख एशियाई मुद्रा बन गया है और अब वह अपने सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपया 85.50 के स्तर तक पहुंच सकता है अगर बाजार की स्थितियां अनुकूल रहती हैं।
रुपया की इस मजबूती का प्रमुख कारण विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी है, लेकिन यह बाहरी झटकों, जैसे कि कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव, के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।