वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की गाथा को विश्व स्तर पर पहुंचाने के लिए राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट परियोजना अब जल्द धरातल पर उतर सकती है। पिछले दो वर्षों से फाइलों में चल रही इस योजना को गुरुवार को होने वाली अहम बैठक में अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है। परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।
राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना का अनुमोदन पहले ही किया जा चुका है। दिवेर, चावंड और हल्दीघाटी में भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब कार्य शुरू होने का रास्ता साफ माना जा रहा है।
महाराणा प्रताप के जीवन और मेवाड़ के गौरव को दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी
राजस्थान सरकार इस परियोजना के माध्यम से महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष, युद्ध कौशल और मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीकों के जरिए देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाना चाहती है। परियोजना की कुल लागत लगभग 200 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने विधानसभा में कहा था कि यदि इस परियोजना पर 1000 करोड़ रुपये भी खर्च करने पड़ें तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।
इन 7 ऐतिहासिक स्थलों का होगा भव्य विकास
1. कुंभलगढ़ – महाराणा प्रताप की जन्मस्थली
दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार वाले कुंभलगढ़ दुर्ग में लाइट एंड साउंड शो, प्रोजेक्शन मैपिंग, पैनोरमा, जंगल ट्रेल, टॉय ट्रेन और हेलीकॉप्टर राइड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
2. गोगुंदा – महाराणा प्रताप की राजतिलक स्थली
यहां राज्याभिषेक पथ स्टैच्यू वॉकवे, महादेव बावड़ी का जीर्णोद्धार और भील संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले विशेष पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे।
3. दिवेर – मेवाड़ की ऐतिहासिक विजय भूमि
1582 में मुगलों पर मिली विजय की याद में विशाल विजय स्मारक और आधुनिक बैटल म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा।
4. हल्दीघाटी – ऐतिहासिक युद्धस्थल
हल्दीघाटी युद्ध को आधुनिक होलोग्राफिक तकनीक से जीवंत बनाया जाएगा। चेतक स्मारक पर सौर ऊर्जा आधारित अखंड ज्योति स्थापित होगी। साथ ही अमेरिका के माउंट रशमोर की तर्ज पर वीर शिरोमणि शिला विकसित करने का प्रस्ताव है।
5. चित्तौड़गढ़ – त्याग और बलिदान की भूमि
विशाल वीर गाथा दीवार, लाइट एंड साउंड शो और सिसोदिया राजवंश की वंशावली को दर्शाने वाली प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
6. चावंड – महाराणा प्रताप की अंतिम राजधानी
चावंड मेमोरियल, चामुंडा माता मंदिर, प्राचीन महल अवशेषों का संरक्षण और महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
7. उदयपुर – मेवाड़ की सांस्कृतिक राजधानी
उदयपुर में राजपूत बाल संग्रहालय, वॉटर प्रोजेक्शन मैपिंग शो और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
अब तक क्या हुआ?
- 8 जून 2024: महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना की घोषणा की।
- DPR तैयार: राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की।
- वित्तीय स्वीकृति: परियोजना को वित्त विभाग से मंजूरी प्राप्त।
- भूमि आवंटन: हल्दीघाटी, दिवेर और चावंड में भूमि उपलब्ध कराई गई।
- गुरुवार की बैठक: केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच बैठक में टेंडर प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय संभव।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा। इससे न केवल देश-विदेश से पर्यटक आकर्षित होंगे बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी बड़ी वृद्धि होगी। आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक विरासत का यह अनूठा संगम मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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