भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री और पहले भारतीय ISS यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज, 14 जुलाई को अंतरिक्ष से धरती पर लौट रहे हैं। उन्होंने अब तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताए हैं। Axiom-4 मिशन के तहत गए शुक्ला की वापसी से पहले 13 जुलाई की शाम को एक फेयरवेल सेरेमनी आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने कहा, “41 साल पहले एक भारतीय अंतरिक्ष में गया था और उसने बताया था कि भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है, आज मैं फिर से कह सकता हूं—आज का भारत अब भी सारे जहां से अच्छा लगता है।”
Gp Capt Shubhanshu Shukla:
🗣 "41 years ago, an Indian went to space and told us how India looks like from space.
…and I can again tell you that today's India still appears Saare Jahan Se Accha" 🇮🇳
Watch this clip from the Axiom-4 Farewell Ceremony on the ISS 🎥 pic.twitter.com/nQMyfBy0YR
— ISRO Spaceflight (@ISROSpaceflight) July 13, 2025
शुक्ला की वापसी से पहले, ISS पर मौजूद 11 अंतरिक्ष यात्रियों ने छह देशों के पारंपरिक व्यंजनों के साथ एक भावनात्मक भोज साझा किया। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम ने इसे अपने जीवन की सबसे यादगार शामों में से एक बताया। Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला (पायलट) के साथ पेगी व्हिटसन (क्रू कमांडर), स्लावोस्ज उज़्नांस्की-विस्निवस्की (पोलैंड) और टिबोर कापु (हंगरी) भी शामिल हैं। यह मिशन 25 जून को लॉन्च हुआ और 26 जून को ISS पहुंचा था।
.@NASA will provide live coverage of the undocking and departure of #Ax4 from the @Space_Station Monday, July 14.
Coverage will begin with hatch closing at 4:30am ET. The four-member astronaut crew is scheduled to undock around 7:05am. https://t.co/FCJVxXtGax
— NASA's Johnson Space Center (@NASA_Johnson) July 11, 2025
शुक्ला ने अंतरिक्ष में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। उन्होंने मायोजेनेसिस नामक जैव विज्ञान प्रयोग पर काम किया, जिसका मकसद यह समझना है कि माइक्रोग्रैविटी में मानव की मांसपेशियां क्यों कमजोर हो जाती हैं। इस शोध से भविष्य में पृथ्वी पर मांसपेशी रोगों के इलाज के लिए भी नई दिशा मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) पर अध्ययन किया, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान खाद्य, ऑक्सीजन और बायोफ्यूल का स्रोत बन सकते हैं।
Ax-4 Mission | Farewell Ceremony https://t.co/QGDDfXD84R
— Axiom Space (@Axiom_Space) July 13, 2025
अन्य प्रयोगों में उन्होंने स्पेससूट की मरम्मत, व्यायाम संबंधी अनुसंधान, आंखों की गतिविधियों, मस्तिष्क पर अंतरिक्ष के प्रभाव, संज्ञानात्मक क्षमताओं, रेडिएशन डोज की गणना, और माइक्रोग्रैविटी में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह के अध्ययन शामिल हैं। अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग कर उन्होंने मस्तिष्क में खून के बहाव की गति और दिशा को मापा।
स्पलैशडाउन के बाद, इसरो के अनुसार, शुभांशु शुक्ला को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होने के लिए एक फ्लाइट सर्जन की निगरानी में लगभग सात दिनों के पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना होगा।
इसरो ने इस ऐतिहासिक मिशन में शुक्ला की भागीदारी के लिए Axiom Space को लगभग ₹550 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। माना जा रहा है कि इस अनुभव से भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की दिशा में ठोस मदद मिलेगी, जिसकी लॉन्चिंग 2027 के लिए प्रस्तावित है।
One of the most unforgettable evenings I’ve experienced on this mission was sharing a meal with new friends, Ax-4, aboard the International @Space_Station.
We swapped stories and marveled at how people from diverse backgrounds and nations came together to represent humanity in… pic.twitter.com/hdzXxrwLaV
— Jonny Kim (@JonnyKimUSA) July 10, 2025
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ, शुभांशु शुक्ला न सिर्फ अंतरिक्ष में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दूसरे भारतीय बने हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और देशभक्ति की मिसाल भी कायम की है।