कर्नाटक में रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूला को लेकर उठे राजनीतिक विवाद ने अब पूरी तरह राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान आकर्षित कर लिया है। इसी स्थिति को सुलझाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 29 नवंबर 2025 को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित पार्टी के शीर्ष निर्णयकर्ता मौजूद रहेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का उद्देश्य मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच बढ़ते मतभेदों को दूर करना और सरकार को स्थिरता प्रदान करना है।
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने 20 नवंबर 2025 को अपने ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा किया, और इसी के साथ रोटेशनल सीएम फॉर्मूला—जिसमें ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद के बदलाव का दावा किया जा रहा था—एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया। डीके शिवकुमार के समर्थक इस फॉर्मूले के लागू होने पर जोर दे रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया गुट इसे नकारते हुए राजनीतिक स्थिरता का हवाला दे रहा है। इससे दोनों नेताओं के बीच तनाव गहरा गया है, जिसका असर सरकार के कामकाज पर भी पड़ने लगा है.
इससे पहले बेंगलुरु में खड़गे ने स्पष्ट किया था कि किसी भी स्थिति में फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा था, “मैं सभी हितधारकों को बुलाकर विस्तृत चर्चा करूँगा। राहुल गांधी भी बैठक में शामिल रहेंगे। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों को सुना जाएगा और निर्णय सामूहिक सहमति से ही होगा।” उन्होंने संकेत दिया कि हाईकमान के हस्तक्षेप से इस विवाद का समाधान खोजा जाएगा और पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ने की कोशिश करेगी।
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम प्रस्तावित कैबिनेट फेरबदल के बाद शुरू हुआ, जिसने सत्ता संतुलन को और अस्थिर कर दिया। अब सबकी निगाहें 29 नवंबर की बैठक पर टिकी हैं, जो कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
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