जयपुर राजस्थान में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं। घग्घर नदी इन दिनों अपने रौद्र रूप में बह रही है और सीमावर्ती गांवों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। शनिवार को नदी में अचानक पानी की मात्रा बढ़कर 5,747 क्यूसेक तक पहुँच गई, जबकि पिछले कुछ दिनों से यह स्तर लगभग 5,000 क्यूसेक पर स्थिर था। दो दिन में करीब 750 क्यूसेक की बढ़ोतरी से प्रशासन सतर्क हो गया है। जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह तक नदी का पानी भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मजनू पोस्ट तक पहुँच गया था।
सूरतगढ़
पंजाब में बाढ़ के बाद श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिले से गुजरने वाली बरसाती नदी घग्घर में बढ़ रहा जलस्तर,
घग्घर बहाव क्षेत्र में 6000 क्यूसेक पानी हो रहा प्रवाहित, लगातार बढ़ रही पानी की आवक को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर,
कमजोर तटबंधों पर लगातार की जा रही निगरानी,
तटबंधों पर… pic.twitter.com/H5pSxJXqNt
— Thar Chronicle (@tharchronicle) September 6, 2025
एसडीएम सुरेश राव ने स्थिति का जायजा लेते हुए बॉर्डर क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। सबसे ज्यादा खतरा गांव 28 ए और पुराना बिजोर में बताया जा रहा है। पुराना बिजोर निचले इलाके में होने के कारण वहां बाढ़ की आशंका और बढ़ जाती है। प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने की अपील की है।
गांव 28 ए में करीब 50 घर हैं, जबकि पुराना बिजोर में 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं। एसडीएम ने बताया कि इन गांवों के लोगों को पहले ही 5 एमएसआर में जगह आवंटित की गई थी, लेकिन उन्होंने पलायन नहीं किया। अब पानी के स्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए उन्हें समय पर स्थानांतरित होने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी एक ओर से निकल जाता है, लेकिन दूसरी ओर से लौट आता है, जिससे कई बार अचानक जलस्तर बढ़ जाता है और स्थिति बिगड़ सकती है।
प्रशासन ने पानी के प्राकृतिक बहाव को बाधित करने वाले सभी अवैध बंधों को हटाने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। हालांकि अब तक किसी भी परिवार ने गांव खाली नहीं किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का दबाव और गहराई बढ़ी तो वे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हो जाएंगे।
खेतों और फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। बहाव क्षेत्र में खड़ी कपास, मूंग और ग्वार जैसी फसलें डूबने के कगार पर हैं। प्रशासन और ग्रामीण मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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