लोकसभा में हंगामा: विपक्षी सांसदों के टी-शर्ट विरोध पर स्पीकर ओम बिड़ला की सख्ती
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने गुरुवार को सदन में विपक्षी सांसदों के नारे लिखी टी-शर्ट पहनने पर कड़ी आपत्ति जताई और सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसद की गरिमा और परंपराओं का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
🔹 स्पीकर का कड़ा रुख: बिड़ला ने विपक्षी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि सदन में नियम 349 के तहत एक गरिमा बनी रहनी चाहिए।
🔹 विरोध का तरीका गलत: विपक्षी सांसद टी-शर्ट पहनकर विरोध जता रहे थे, जिन पर नारे लिखे थे, जिससे स्पीकर नाराज हुए।
🔹 DMK सांसद टी शिवा का विरोध: उन्होंने “निष्पक्ष परिसीमन” की मांग करते हुए टी-शर्ट पर लिखा था— “निष्पक्ष परिसीमन, तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा”।
🔹 स्पीकर का बयान: “अगर आप नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर आएंगे, तो सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी।”
क्या है परिसीमन विवाद?
✅ परिसीमन (Delimitation) के तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा नए जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर तय की जाती है।
✅ दक्षिण भारतीय राज्य, खासकर तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का मानना है कि नई परिसीमन प्रक्रिया से उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं, क्योंकि वे जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे हैं।
✅ वहीं उत्तर भारत के राज्यों को फायदा हो सकता है, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है।
राजनीतिक प्रभाव:
🔸 विपक्षी दलों को लगता है कि सरकार दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें घटाकर राजनीतिक संतुलन बदल सकती है।
🔸 संसद में विरोध को दबाने के लिए स्पीकर की सख्ती पर विपक्षी दल “लोकतंत्र की आवाज दबाने” का आरोप लगा सकते हैं।
🔸 भाजपा का पक्ष: केंद्र सरकार अभी तक इस मुद्दे पर चुप है, लेकिन परिसीमन को “संतुलित और न्यायसंगत” बनाने की दलील दे सकती है।
आगे क्या होगा?
➡ विपक्षी दल शायद इस मुद्दे को बजट सत्र या आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बना सकते हैं।
➡ संसद में टी-शर्ट विरोध पर नए दिशानिर्देश आ सकते हैं।
➡ परिसीमन को लेकर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना होगा, ताकि क्षेत्रीय असंतोष न बढ़े।