मध्य एशिया इस समय वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। इजरायल की ओर से गाजा में हमास के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान के बीच ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की घोषणा की है। इस कदम के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होगी।
नेतन्याहू ने कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना हमास को इनाम देने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया—“ऐसा नहीं होगा। जॉर्डन नदी के पश्चिम में फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल जल्द ही जवाबी कदम उठाएगा। इसके लिए वह अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं और व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। नेतन्याहू ने कहा कि इस यात्रा के बाद इजरायल अपनी रणनीति और जवाबी कदम की घोषणा करेगा।
इजरायली विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि हमास के नेताओं ने कहा था कि फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता मिलना 7 अक्टूबर 2023 के नरसंहार का परिणाम है। उस दिन हमास के लोगों ने इजरायल में घुसकर करीब 1200 लोगों की हत्या की थी। नेतन्याहू ने इजरायली कैबिनेट की बैठक में कहा कि इजरायल संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दुष्प्रचार को चुनौती देगा और फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के प्रयासों को अस्वीकार करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा होगी और आतंकवाद को इनाम देने जैसा कदम साबित होगी।
नेतन्याहू के विरोध का मुख्य कारण द्वि-राष्ट्र सिद्धांत और ऐतिहासिक विवाद हैं। 1967 के युद्ध के बाद इजरायल ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बड़ी संख्या में यहूदी बस्तियां बसाई हैं, जिनमें लाखों लोग रहते हैं। इसके अलावा, ऐतिहासिक शहर यरुशलम को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद है। नेतन्याहू फिलिस्तीनी राष्ट्र को इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं और इसलिए इसके गठन के खिलाफ हैं।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग 146 देश फिलिस्तीन को मान्यता देते हैं। भारत ने 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दे दी थी। हालांकि, जी-7 देशों में से कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और अमेरिका में फिलहाल तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी गई थी। लेकिन हाल ही में कनाडा और ब्रिटेन ने इस कदम की घोषणा की है। ऑस्ट्रेलिया ने भी फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है, और फ्रांस, पुर्तगाल समेत अन्य कई देश इस सूची में शामिल हो सकते हैं।