करीब 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 सप्ताह के अस्थायी सीजफायर की घोषणा करते हुए इसे शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया है। हालांकि, इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बयान एक-दूसरे से काफी अलग हैं, जिससे यह साफ होता है कि कूटनीतिक स्तर पर अभी भी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक बढ़त की लड़ाई जारी है।
राष्ट्रपति ट्रंप की पोस्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के अनुरोध के बाद लिया गया। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने Strait of Hormuz को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमति जताई है, जिसके बदले अमेरिका ने दो सप्ताह के लिए बमबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है। ट्रंप के अनुसार यह “डबल साइडेड सीजफायर” है, यानी दोनों पक्षों द्वारा एक साथ युद्धविराम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है और उससे भी आगे बढ़ चुका है, जबकि ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका को ईरान से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने वार्ता के लिए एक व्यावहारिक आधार बताया और उम्मीद जताई कि अगले दो हफ्तों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की पोस्ट
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस घटनाक्रम को ईरान की कूटनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व—विशेष रूप से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर—का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से क्षेत्र में युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अराघची ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को वार्ता का आधार मानने की घोषणा की है, जो इस समझौते का मुख्य कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ईरान पर हमले रोक देता है, तो ईरान भी अपनी रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई बंद कर देगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी दो सप्ताह तक Strait of Hormuz से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा, जो ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से संभव होगा।
Statement on behalf of the Supreme National Security Council of the Islamic Republic of Iran: pic.twitter.com/cEtBNCLnWT
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 7, 2026
अमेरिका के साथ सीजफायर पर राजी होने वाले ईरान की 10 शर्तें इस प्रकार हैं-
- आगे कोई आक्रामकता नहीं यानी ईरान पर कोई हमला न होने की गारंटी हो
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का लगातार नियंत्रण जारी रहेगा
- ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकृत देनी होगी
- सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाना
- सभी द्वितीयक प्रतिबंध हटाना
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
- आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
- ईरान को हमले में हुए नुकसान के लिए अमेरिका द्वारा मुआवजा का भुगतान करना
- मिडिल-ईस्ट क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू सैन्य बलों की वापसी
- सभी मोर्चों पर युद्ध का अंत हो, जिसमें लेबनान के वीर इस्लामिक प्रतिरोध (हिजबुल्लाह) के खिलाफ युद्ध भी शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि भले ही युद्धविराम की घोषणा हो गई हो, लेकिन दोनों पक्ष इसे अपनी-अपनी रणनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहे हैं। जहां अमेरिका इसे अपने सैन्य और कूटनीतिक दबाव का परिणाम बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी शर्तों की स्वीकृति के रूप में देख रहा है। आने वाले दो सप्ताह इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान यह तय होगा कि यह अस्थायी सीजफायर स्थायी शांति समझौते में बदलता है या फिर क्षेत्र एक बार फिर तनाव और संघर्ष की ओर बढ़ता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel