भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी आयोग “यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम” (USCIRF) की 2025 वार्षिक रिपोर्ट को सख्त लहजे में खारिज कर दिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे “राजनीतिक रूप से प्रेरित और पक्षपातपूर्ण आकलन” बताया, जिसका उद्देश्य भारत की छवि को धूमिल करना है।
भारत की प्रतिक्रिया:
🔹 USCIRF का एजेंडा-प्रेरित रवैया
- रिपोर्ट में भारत की बहुसांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता की वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
- आयोग का यह लगातार प्रयास धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर वास्तविक चिंताओं से अधिक एक सुनियोजित एजेंडे को दर्शाता है।
🔹 भारत का बहुलवादी समाज
- भारत 1.4 बिलियन लोगों का घर है, जहां सभी धर्मों के अनुयायी शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहते हैं।
- USCIRF से यह उम्मीद करना कि वह भारत के विविध और सहिष्णु समाज को स्वीकार करेगा, निरर्थक है।
🔹 लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश नाकाम
- भारत लोकतंत्र और सहिष्णुता का प्रतीक है, जिसे कमजोर करने के कोई भी प्रयास सफल नहीं होंगे।
- उल्टा, यह खुद USCIRF की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
USCIRF की लगातार पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज किया है। पिछले साल भी भारत ने इसे ‘मोटिवेटेड नैरेटिव’ करार दिया था।
- USCIRF लंबे समय से भारत के बारे में भ्रामक और मनगढ़ंत दावे करता आ रहा है।
- यह रिपोर्ट भारत की वास्तविकता को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है और इसका उद्देश्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाना है।
Our response to media queries regarding the 2025 Annual Report of United States Commission on International Religious Freedom⬇️
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) March 26, 2025
भारत का कड़ा संदेश:
रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अडिग रहेगा और USCIRF की दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट को पूरी तरह अस्वीकार करता है।
➡ क्या USCIRF के खिलाफ भारत कोई कूटनीतिक कदम उठाएगा?
➡ क्या अमेरिकी प्रशासन USCIRF की सिफारिशों को गंभीरता से लेगा?
➡ क्या यह मुद्दा भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डालेगा?