झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में वनवासी समुदाय के 68 परिवारों के 200 लोगों की सनातन धर्म में घर वापसी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक घटना है। यह कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में आयोजित हुआ, जिसमें विश्व कल्याण आश्रम द्वारा स्वधर्मानयन अभियान चलाया गया।
घटना का सारांश:
📍 स्थान: गोइलकेरा प्रखंड, पारलीपोस गांव, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड
📍 आयोजन: 56वां नि:शुल्क चिकित्सा शिविर एवं स्वधर्मानयन अभियान
📍 संख्या: 68 परिवार, कुल 200 वनवासी जनजातीय लोग
📍 विधि: गंगाजल का पान और श्री राम नाम वाचन कर सनातन धर्म में पुनः प्रवेश
घटना की पृष्ठभूमि:
✅ इन वनवासी समुदायों का पहले मतांतरण कराया गया था, लेकिन वे सनातन धर्म से पूरी तरह अलग नहीं हो पाए।
✅ शंकराचार्य जी की धर्म संचार सभाओं के माध्यम से उनमें जागृति आई।
✅ धर्मांतरण के कुचक्र को समझने के बाद उन्होंने खुद स्वधर्म में वापसी का निर्णय लिया।
✅ कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्मचारी विश्वानंद जी, इंद्रजीत मालिक, शिव प्रसाद सिंहदेव और रॉबी लकड़ा जैसे लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शंकराचार्य जी का संदेश:
🔸 उन्होंने भगवद गीता के श्लोक “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः” का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने धर्म का पालन करना ही श्रेयस्कर होता है।
🔸 उन्होंने बताया कि सनातन धर्म की महानता यही है कि यह अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
महत्वपूर्ण प्रभाव:
✅ यह घटना जनजातीय समुदायों में सनातन धर्म के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।
✅ यह धर्मांतरण के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता का संकेत देती है।
✅ स्वधर्मानयन अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिससे अन्य प्रभावित समुदायों को भी प्रेरणा मिलेगी।
यह घर वापसी अभियान न केवल सामाजिक पुनर्जागरण का प्रतीक है बल्कि यह भी दर्शाता है कि संस्कृति और आस्था की जड़ें कितनी गहरी होती हैं।